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दो खदानें चालू करें, वर्ना पत्नी-बच्चों के साथ सड़क पर उतरेंगे मजदूर
पर्यावरणएनओसी नहीं मिलने के कारण 1 जनवरी से जिलेभर की रेत खदानंे बंद पड़ी हैं। इससे लोगों को भवन निर्माण के लिए रेत नहीं मिल पा रही है। वहीं मजदूरों के सामने भी परिवार का भरण-पोषण करने की समस्या खड़ी हुई है। इसको लेकर रेत खदानें चालू करने की मांग उठने लगी है। मंगलवार को ताप्ती खनिज ट्रैक्टर ट्रांसपोर्ट यूनियन सदस्यों ने रैली निकालकर विरोध जताया। पदाधिकारी-सदस्यों ने अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा लोगों को रेत मुहैया कराने और मजदूरों के परिवारों की रोजी-रोटी के लिए कोई भी दो खदान चालू की जाए। ऐसा नहीं किया तो प|ी-बच्चों के साथ मजदूर सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे। इकबाल चौक से सुबह 11 बजे बाइक और ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ रैली निकाली गई। जयस्तंभ, शनवारा, सिंधीबस्ती होती हुई रैली कलेक्टोरेट पहुंची। इसमें 70 बाइक पर 150 मजदूर और 10 ट्रैक्टर-ट्रॉली पर 50 मजदूर सवार थे। कलेक्टोरेट में पदाधिकारियों ने अपर कलेक्टर प्रकाश रेवाल को ज्ञापन सौंपा। यूनियन अध्यक्ष नफीश मंशा खान ने कहा जिले में 1 जनवरी से रेत खदानें बंद पड़ी हैं। इससे 20 हजार परिवार के 60 हजार लोग जुड़े हैं। काम नहीं मिलने से मजदूरों की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है। वे ठेकेदारों से रुपए मांग कर घर चला रहे हैं। डेढ़ महीना होने को आया लेकिन अब तक ठेकेदारों को पर्यावरण विभाग से अनुमति नहीं मिल पाई है। ऐसे में मजदूरों का परिवार कहां जाएगा। कब तक भीख मांगकर परिवार का पालन-पोषण करेंगे।
नागझिरी, राजघाट, फतेहपुर, बसाड़, जैनाबाद की रेत खदानों काे दो साल से पर्यावरण विभाग की अनुमति नहीं मिल पाई है। इस कारण 1 जनवरी से इनका ठेका निरस्त कर दिया गया। अब इन खदानों की दोबारा नीलामी की जाएगी। हालांकि अभी इसकी तारीख तय नहीं है।
नई खदानें भी बंद पड़ीं
खनिजविभाग ने 6 दिसंबर को सात नईं खदानें नीलाम की थी। लेकिन पर्यावरण विभाग की अनुमति नहीं ला पाने के कारण ये खदानें भी बंद पड़ी हैं। इनमें नाचनखेड़ा, गव्हाना, हतनूर, रेहटा, सुखपुरी, बोरगांवखुर्द, दर्यापुर की खदानें शामिल हैं।
निर्माण कार्य ठप पड़े हैं, हो रहा अवैध उत्खनन
मजदूरोंने कहा खदानें बंद पड़ी हैं। निर्माण कार्य ठप पड़े हैं। लेकिन रेत का अवैध उत्खनन जारी है। दिन-रात अवैध खनन चल रहा है। इसे रोका जाए। प्रशासन कोई भी दो खदान चालू कराएं। यहां राजस्व विभाग के अफसरों को तैनात करें। नियमानुसार ट्रैक्टर-ट्राॅली वालो से रायल्टी लें। इससे शासन को भी राजस्व मिलेगा। मजदूरों को भी रोजी-रोटी मिलेगी। 31 दिसंबर तक जिले में रेत की ट्राली 1650 से 1800 रुपए तक बिक रही थी। खदानें बंद हाेने के बाद रेत की कालाबाजारी भी बढ़ गई है। जरूरतमंदों को एक ट्रॉली रेत के 2500 रुपए तक चुकाने पड़ रहे हैं।
नफीस मंशा खान ने अपर कलेक्टर प्रकाश रैवाल को स्थिति से अवगत कराया।