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केले के तने से मेट, कारपेट, वस्त्र बनाने की तकनीक इजाद करें

6 वर्ष पहले
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दस साल में जिले ने बेहतर तरक्की की- डॉ.कटोच

सिटीरिपोर्टर |बुरहानपुर

बुरहानपुरजिले ने पिछले दस साल के दौरान बेहतर तरक्की की है। विकास के लिए भारत सरकार हर संभव सहायता प्रदान करेगी। जिन क्षेत्रों में विकास की संभावना है और जहां विकास में कमी है ऐसे विभागों के प्रति केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित कराया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार से संपर्क कर सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।

भारत सरकार के भारी उद्योग एवं लोक उद्यम मंत्रालय सचिव डॉ.राजन एस कटोच ने जिला स्तरीय विभागीय समीक्षा बैठक में मंगलवार को यह बात कही। उन्होंने कहा पिछले दस साल में जिले में बेहतर विकास कार्य किए गए हैं। इससे तमाम क्षेत्रों में उन्नति के आयाम स्थापित हुए हैं। बुरहानपुर जिला बनने के बाद कृषि, उद्यानिकी, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, रोजगार, सड़कें आदि विभिन्न क्षेत्रों में 15 से 50 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। यह उपलब्धि सराहनीय है। कलेक्टर जेपी आइरिन सिंथिया ने डॉ. कटोच को विभिन्न विभागों की जानकारी दी। एसपी अनिलसिंह कुशवाह, अपर कलेक्टर प्रकाश रेवाल, जिला पंचायत सीईओ बसंत कुर्रे, डिप्टी कलेक्टर शंकरलाल सिंघाड़े, केएल यादव, सुमेरसिंह मुजाल्दा, अजीत श्रीवास्तव, एसडीएम काशीराम बड़ोले मौजूद थे।

10साल में 30-35 से 75-80 टन हुआ प्रति हेक्टेयर उत्पादन - कलेक्टरने प्रोजेक्टर के माध्यम से बताया जिले की जनसंख्या 7,57847 है। साक्षरता दर 65.28 प्रतिशत है। केला, गन्ना, कपास प्रमुख फसल है। कृषि रकबा 1 लाख25795 हेक्टेयर है। तीन बड़े उद्योग नेपा मिल्स लिमिटेड, नवलसिंह सहकारी शकर कारखाना, बुरहानपुर ताप्ती मिल्स है। जिले में 521 प्राथमिक, 212 माध्यमिक, 35 हाईस्कूल और 46 हायर सेकंडरी स्कूल है। 740 आंगनवाड़ी, 40 मिनी आंगनवाड़ी है। फसलों में सर्वाधिक उत्पादन 15,05000 टन केले का होता है। अनार, अमरूद, सब्जी, मसाला अन्य उत्पादन भी होता है। 10 साल में इसका उत्पादन 30-35 टन से 75-80 टन प्रति हेक्टेयर हुआ है।

जो चाहाेगे उस रंग का हो जाएगा कपड़ा

मंत्राके डॉ. बसू ने बताया सूरत में 7 लाख से अधिक पावरलूम 1980 से विकसित हैं। वस्त्र उद्योग के विकास में भारत सरकार सहयोग कर रही है। वस्त्रों का निर्माण उच्च तकनीक से किया जा रहा है। पर्यावरण, कृषि के मद्देनजर वस्त्र बनाए जा रहे हैं। मशीनरी, बैग, अटैची, सीट, सोफा, पर्दे, चादर, कार्पेट, बेडशीट सहित सभी प्रकार का कपड़ा बनाया जा रहा है। इसमें वनस्पति का भी प्रसंस्करण किया जा रहा है। ऐसे कपड़े बनाए जा रहे हैं जिन्हें पहनने वाला जो रंग चाहेगा कपड़ा उस रंग का हो जाएगा। सहायक संचालक रोटेक्टस (इंदौर) पवन पाराशर, मंत्रा के एएन जरीवाला ने भी आधुनिक दौर में उपलब्ध वस्त्र उद्योग की तकनीक से उत्पादकों को अवगत कराया।