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जो इंद्रियों का दास नहीं, वही व्यक्ति संसार में सुखी है

7 वर्ष पहले
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जो इंद्रियों का दास नहीं है वही व्यक्ति संसार में सुखी है। जिसने मन पर नियंत्रण कर लिया वह हमेशा आनंद स्वरूप है। ऐसे लोग हर परिस्थिति में मस्त रहते हैं। ऐसे स्थिर बुद्धि वाले व्यक्ति अल्प या क्षणिक सुख के पीछे नहीं भटकते। स्थिर बुद्धि के व्यक्ति स्थायी आनंद की खोज में ज्ञानीजन के पास जाते हैं। वे सत्संग, स्वाध्याय करते हैं। ज्ञान पाकर जीवन काे सुखी-संपन्न बनाते हैं।

इंदिरा कॉलोनी स्थित राजस्थानी भवन में शनिवार दोपहर 5.30 बजे दुर्लभ भक्ति ज्ञान यज्ञ के तहत व्यासपीठ से आचार्य गोविंदरामजी शर्मा (हरिद्वार) ने यह विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा स्थिर बुद्धि के लोग दुखमय जीवन को जान कर पूर्ण शाश्वत, आनंद स्वरुप परमात्मा की शरण में जाकर अनन्य भक्ति के द्वारा अपने में दैवीय गुणों का विकास करते हैं। तत्व ज्ञान को प्राप्त करके परम शांति का वरण करते हैं। ऐसे ज्ञान-संपन्न लोग जीवन को पवित्र करते हैं। अन्य जीवों को भी सुख का संदेश पहुंचाते है।

गीता,भागवत, संतवाणी बाद हुआ योग प्राणायाम - दुर्लभभक्ति ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन आदर्श कॉलोनी स्थित शाकंभरी माता मंदिर में सुबह 5 बजे से प्रभु की स्तुति की गई। भक्तों ने एक घंटे तक भगवत गीता, रामचरित मानस, संतवाणी का पाठ किया। सुबह 6.30 बजे तक राजस्थानी भवन में योग-प्राणायाम कराए गए। प्रवचन बाद रात 8 बजे से कथा स्थल पर प्रश्नोत्तरी सत्र शुरू हुआ। इसमें भक्तों से धार्मिक प्रश्न पूछे गए। इस दौरान महेंद्र पारीख, दामाेदर तोदी, राजू जालान सहित कई श्रद्धालु मौजूद थे।

राजस्थानी भवन में बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने कथा का रसपान किया। इनसेट: आचार्यगोविंदरामजी शर्मा ने दुर्लभ भक्ति ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन व्यक्ति के जीवन को सुखमय बनाने के गुर बताए।

दुर्लभ भक्ति ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन पं. शर्मा ने कहा