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सालभर में 60 हजार पर्यटक पहुंचे िफर भी नहीं हैं सुविधाएं
भास्कर संवाददाता| बुरहानपुर
करीब150 ऐतिहासिक धरोहरों वाले बुरहानपुर जिले में पिछले साल 62184 पर्यटक पहुंचे। इनमें 61796 पर्यटक भारतीय और 388 विदेशी थे। हालांकि उन्हें पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल सकीं। बुरहानपुर को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने के लिए जरूरी है कि यहां धरोहरों को संजोने के साथ ही आधुनिक सुविधाएं मुहैया कराई जाएं। इसके लिए प्रयास भी शुरू हो गए हैं। शाही किले से आहूखाना के बीच रोप-वे निर्माण के लिए विधायक अर्चना चिटनीस ने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के माध्यम से भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा है। शाही किले में प्राचीन फव्वारों को आधुनिक उपकरणों से फिर चालू किया जा सकता है। यहां दो साल पहले लगाए गए दूधिया लाइट भी बंद पड़े हैं। इसी तरह अन्य धरोहरों पर भी बदहाली पसरी है।
34 धरोहरों तक पहुंचमार्ग| ऐतिहासिक,व्यापारिक और सांस्कृतिक महत्व के बाद भी बुरहानपुर विकसित नहीं हो सका। यहां की 150 धरोहरों में से सिर्फ 34 तक ही पहुंचमार्ग है। पर्यटक सुविधा केंद्र का अभाव है। ऐतिहासिक महत्व और पर्यटन की संभावनाओं को देखते हुए यहां रिलिजस टूरिज्म, हेरिटेज टूरिज्म, ट्रेकिंग टूरिज्म, वाटर टूरिज्म, इको टूरिज्म को विकसित किया जा सकता है।
शाही किले पर सिर्फ बगीचा ही आकर्षण का केंद्र है।
मेगा सर्किट, मेगा डेस्टिनेशन के लिए भेजा प्रस्ताव
विधायकअर्चना चिटनीस ने कहा बुरहानपुर को मेगा सर्किट योजना और मेगा डेस्टिनेशन में शामिल किए जाने के लिए मुख्यमंत्री के माध्यम से भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा है। शाही किले और आहूखाना के बीच रोप-वे, पर्यटन रथ, बसों का परिचालन, बड़े संग्रहालयों का निर्माण, लाइट एंड साउंड कार्यक्रम की शुरूआत की जा सकती है। पर्यटकों के सत्कार और शहर के युवाओं के लिए पॉलीटेक्निक कॉलेज में हाॅस्पीटलिटी ट्रेनिंग सेंटर शुरू किया जा सकता है।
उच्च स्तर तक होना चाहिए प्रयास
अधिवक्ताशेख फारूक ने कहा पर्यटन को लेकर जागरुकता की कमी है। पर्यटन की संभावना पर विचार की जरूरत है। प्रशासन, उद्योग से जुड़े लोगों को समन्वय स्थापित कर पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है। तभी हमारे शहर के लिए पर्यटन दिवस के मायने रहेंगे। इतिहास के जानकार होशंग हवालदार ने कहा मैं खुद विदेशी पर्यटकों को गाइड कर इतिहास बता रहा हूं। पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर उन्हें एक साथ नहीं ले जाया जा सकता। महत्वपूर