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खाद-बीज दुकानें बंद रखकर नारेबाजी की

5 वर्ष पहले
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व्यापारियों ने पीएम के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा

भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर

लाइसेंस की नई प्रक्रिया से खाद-बीज दुकान संचालकाें को बेरोजगारी का डर सताने लगा है। जिले के 300 विक्रेताओं ने तुगलकी फरमान के विरोध में हड़ताल स्वरूप एक दिन दुकानें बंद रखी। खाद-बीज के लिए किसान परेशान होते रहे।

मंगलवार को खाद-बीज विक्रेता एसोसिएशन के बैनर तले हड़ताल हुई। सुबह 11.30 बजे एकजुट होकर सभी संयुक्त जिला कार्यालय पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम कलेक्टर जेपी आइरीन सिंथिया को ज्ञापन सौंपा। एसोसिएशन अध्यक्ष संजय पाटीदार ने कहा- अधिकांश खाद-बीज दुकान 40 से 50 साल पुरानी है। कृषि स्नातक की डिग्री चार साल में मिलती है। इधर, शासन ने दो साल में डिग्री लेने का तुगलकी फरमान जारी किया है। सचिव सुधामा इंगले ने कहा- हड़ताल से खाद-बीज विक्रेताओं का 30 लाख रुपए का कारोबार प्रभावित हुआ है। जिले में 300 खाद-बीज विक्रेता हैं। इनमें से मुश्किल से चार विक्रेताआें के पास कृषि स्नातक की डिग्री है। अधिकांश दुकान संचालक ग्रेजुएट, 12वीं तो कोई अन्य डिग्री धारी है। कृषि कल्याण उपसंचालक एमएस देवके ने बताया गुणवत्तायुक्त खाद-बीज के विक्रय को लेकर लाइसेंस की प्रक्रिया में बदलाव किया है। वित्तीय वर्ष 2016-17 में कृषि स्नातक को लाइसेंस जारी किए जाएंगे।

यह है नया नियम
नई लाइसेंस प्रक्रिया में कृषि विषय में स्नातक होना जरूरी है। शासन लाइसेंस के लिए कृषि स्नातक, कृषि रसायन की डिग्री मांग रहा है। जिनके पास कृषि स्नातक की डिग्री नहीं है, उसे दो साल के अंदर डिग्री लेने के आदेश जारी किए हैं। अक्टूबर 2015 में आदेश जारी हुए थे। 2016-17 तक डिग्री लाना होगी। स्नातक होना आवश्यक है।

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