• Hindi News
  • Madhya Pradesh
  • Burhanpur
  • 500 साल बाद अब लौटेगा अकबरी और जैनाबादी सराय का मूल स्वरूप
विज्ञापन

500 साल बाद अब लौटेगा अकबरी और जैनाबादी सराय का मूल स्वरूप

Dainik Bhaskar

Jan 18, 2016, 11:10 AM IST

Burhanpur News - इधर, सराय में थीं वातानुकूलित पांच स्टार होटल सी सुविधाएं जिला प्रशासन पर्यटन विभाग भोपाल से जुटाएगा राशि ...

500 साल बाद अब लौटेगा अकबरी और जैनाबादी सराय का मूल स्वरूप
  • comment
इधर, सराय में थीं वातानुकूलित पांच स्टार होटल सी सुविधाएं

जिला प्रशासन पर्यटन विभाग भोपाल से जुटाएगा राशि

भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर

अंडा बाजार की मुगलकालीन अकबरी और जैनाबाद की जैनाबादी सराय 500 साल बाद अपने मूल स्वरूप में लौटेगी। जिला प्रशासन इनके जीर्णोद्धार के लिए राज्य पर्यटन विभाग से राशि जुटाएगा। इसको लेकर प्रशासन ने प्रयास तेज कर दिए हैं।

राज्य पर्यटन विभाग से कलेक्टर को पत्र आया था। इसमें सराय पुरातत्व विभाग को हैंडओवर करने को कहा गया है। फिलहाल अकबरी सराय पर नगर निगम का कब्जा है। यहां निगम के खस्ताहाल कचरा वाहन खड़े हैं। बताते हैं 100 साल पहले निगम काे सराय लीज पर मिली थी। यहां खाद्य तेल और केरोसिन के व्यापारियों को गोडाउन किराए पर दे दिए गए। भंगार भी पटक दिया गया। जल्द ही यहां से नगर निगम का कब्जा हटेगा। देखरेख के अभाव में दोनों सराय खस्ताहाल हो गई।

अंडा बाजार

सराय : अकबरी

कमरे: 110

पड़ाव: सूबे सालार, सूबेदार, प्रशासनिक अधिकारी

निर्माण: गर्वनर अब्दुल रहीम खानखाना

जैनाबाद

सराय:
जैनाबादी

कमरे: 80

पड़ाव: दक्षिण के व्यापारी।

निर्माण: निजाम आसिफ जा अव्वल। हैदराबाद के नवाब थे।

कसेरा बाजार

सराय:
जहांगीर

कमरे: 70

पड़ाव: विदेश और देश के विभिन्न प्रांत के व्यापारी।

निर्माण: शाहनवाज खान। रहीम के बेटे और सूबेदार थे।

आदीलपुरा

सराय:
अरजानी

कमरे: 60

पड़ाव: फौजी और सूबे सालार।

निर्माण: हकीम अकबर अरजानी। औरंगजेब के निजी हकीम थे।

बोरगांव मढ़ी

सराय:
मिसरी

कमरे: 70

पड़ाव : सेनापति, मुख्य रक्षक। गोपनीय बैठक होती थी।

निर्माण: हकीम मिसरी। अकबर के निजी हकीम थे।

सराय का इतिहास

मूल स्वरूप में लाएंगे सराय


जल्द हटवाएंगे निगम का बाकी सामान


निगम ने यहां तेल व्यापारियों को गोडाउन के लिए कमरे किराए पर दे रखे हैं।

संजय वारुड़े | बुरहानपुर

16वीं शताब्दी के मुगलकालीन गवर्नर, नवाब और हकीमों ने बुरहानपुर में पांच सराय बनवाई थीं। यहां व्यापार अौर युद्ध की दृष्टि से सूबेदार, सूबे सालार, सेनापति, प्रशासनिक अधिकारी और व्यापारी ठहरते थे। मुगलकाल में बुरहानपुर को खत-ए-सरतान याने गर्म क्षेत्र कहा जाता था। यहां वातानुकूलित 5 स्टार होटल सी सुविधाओं युक्त सराय बनाई गईं थीं। 500 साल पहले कमरों को ठंडा और गर्म करने की अनोखी व्यवस्था थी। सराय आज भी मौजूद है। अफगानिस्तान, इरान और लाहौर में भी सराय थी। समय के साथ यह जमींदाेज होती गईं। कसेरा बाजार की जहांगीर और आदिलपुरा की अरजानी सराय में मदरसा चल रहा है। असीर पंचायत की मढ़ी की सराय पर आदिवासियों का कब्जा है। अकबरी और जैनाबादी सराय उपेक्षित पड़ी हैं।

इस तरह करते थे कमरों को ठंडा

इतिहासकार कमरूद्दीन फलक के अनुसार मुगलकाल सराय के कमरों के गुंबद पर हवा आने-जाने का छिद्र है। इसमें भूसा भरकर बर्फ रखी जाती थी। उस पर नमक डालते थे। कमरों के अंदर एक हैंडल था। इससे ठंडी हवा को बंद-चालू कर सकते थे।

500 साल बाद अब लौटेगा अकबरी और जैनाबादी सराय का मूल स्वरूप
  • comment
X
500 साल बाद अब लौटेगा अकबरी और जैनाबादी सराय का मूल स्वरूप
500 साल बाद अब लौटेगा अकबरी और जैनाबादी सराय का मूल स्वरूप
COMMENT
Astrology

Recommended

Click to listen..
विज्ञापन
विज्ञापन