पांच जिलों के अफसर जानेंगे शहर की आंगनवाड़ियों के नवाचार
इंदौर, भोपाल, रीवा, सतना, सीहोर के अफसर 18 और 19 फरवरी को एक-एक आंगनवाड़ी का करेंगे भ्रमण, 25 फरवरी तक प्रतिवेदन संचालनालय को भेजेंगे
उपलब्धि
भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर
बुरहानपुर की आंगनवाड़ियों के नवाचार प्रदेशभर के जिलों में लागू होंगे। इससे पहले पांच जिलों के एकीकृत बाल विकास सेवा अधिकारी इन नवाचारों को करीब से जानेंगे। दो दिन तक वे एक-एक आंगनवाड़ी का भ्रमण करेेंगे।
एकीकृत बाल विकास सेवा आयुक्त पुष्पलता सिंह ने इसको लेकर आदेश जारी किए हैं। उन्होंने पांच जिलों के अफसरों को 18 और 19 फरवरी को बुरहानपुर की आंगनवाड़ियों का जायजा लेने को कहा है। इसके तहत इंदौर, भोपाल, रीवा, सतना, सीहोर के एकीकृत बाल विकास सेवा कार्यक्रम अधिकारी बुरहानपुर पहुंचकर एक-एक आंगनवाड़ी और यहां के नवाचार देखेंगे। इसके बाद वे 25 फरवरी तक प्रतिवेदन संचालनालय को भेजेंगे। एकीकृत बाल विकास सेवा के कार्यक्रम अधिकारी अब्दुल गफ्फार खान ने बताया पांच जिलों के अफसर जिले की आंगनवाड़ियाें का भ्रमण करेंगे। इसके बाद इन नवाचारों को वहां की आंगनवाड़ियों में लागू किया जाएगा। इसके लिए आयुक्त ने आदेश जारी किए हैं।
टिफिन
आंगनवाड़ियों में मिलने वाला थर्ड मील बच्चे पूरा नहीं खा पाते। बचा भोजन टिफिन में घर ले ला रहे हैं। इससे पोषण का स्तर सुधरा।
विकास कार्ड
इसमें बच्चों का शारीरिक और मानिसक विकास दर्ज किया गया। कमी पाई जाने पर इसे दूर किया गया।
यूनिफार्म
आंगनवाड़ियों में यूनिफार्म लागू किया गया। इससे समानता, सद्भावना, एकता का विकास किया। 218 आंगनवाड़ी केंद्रों में इसे लागू किया।
टायर के झूले
आंगनवाड़ियों में टायर के झूले लगाए गए। बच्चों के लिए मनोरंजन का साधन बना। आपसी सहयोग की भावना विकसित हुई। 600 आंगनवाड़ियों में टायर के झूले लगाए।
टेबल
अनुशासन सिखाने, आत्मविश्वास बढ़ाने के उद्देश्य से कुर्सी के साथ सेंट्रल टेबल का प्रयोग प्री-स्कूल एक्टीविटी, नाश्ता, भोजन के लिए किया गया। जनसहयोग से हर आंगनवाड़ी में 3 हजार रुपए खर्च कर कुर्सी, टेबल की व्यवस्था की गई।
न्यूट्री कार्नर
कई बार बच्चे आंगनवाड़ी में नाश्ते के समय मौजूद नहीं रह पाते। इस कारण भूखे रह जाते हैं। न्यूट्री कॉर्नर के तहत आंगनवाड़ी में पारदर्शी बरनी में चना, मुरमुरे, लड्डू सहित अन्य पोषण सामग्री रखी गई। भूख लगने पर बच्चे खुद सामग्री निकालकर खाने लगे। 500 आंगनवाड़ी में इसे लागू किया गया।
प्रकृति को जान रहे
प्राकृतिक संसाधनों का स्कूल से पहले शिक्षा में उपयोग किया गया। इससे बच्चे प्रकृति से रूबरू हुए। इनका उपयोग और फायदे जाने। 4 आंगनवाड़ियों में यह नवाचार लागू किया जा चुका है।
हैंडवाश
बच्चों में छोटी उम्र से सफाई की आदत डाली जा रही है। हैंड वाश यूनिट से बच्चों को हाथ धोने का तरीका और महत्व बताया जा रहा है।
फेंसी ड्रेस
आंगनवाड़ियों में फैंसी ड्रेस, ड्रेस कोड लागू किया गया। फैंसी ड्रेस में फल, सब्जी, जानवरों की पोशाक पहन बच्चे इनसे परिचित हुए। 20 सेक्टर में यह प्रयोग किया गया।
कुर्सियां
प्ले स्कूल बनाने के लिए कुर्सियों की व्यवस्था की गई। स्कूल जाने से पहले ही विद्यार्थियों ने यूनिफार्म और बैठने का अनुशासन सीख लिया। उनमें आत्म सम्मान और आत्मविश्वास की भावना विकसित की गई। 418 आंगनवाड़ियों में यह नवाचार किया गया।
ये नवाचार देखेंगे अफसर