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मौत पर फिर बवाल डॉक्टर से बदसलूकी

7 वर्ष पहले
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दूसरे डॉक्टर आने से पहले ही भाग जाते हैं ड्यूटी डॉक्टर

जिला अस्पताल में इमरजेंसी वार्ड में दिनभर मरीज आते हैं। जिलेभर में होने वाले सड़क हादसों के बाद घायलों को यहां पर पहुंचाया जाता है। यहां के इमरजेंसी वार्ड में 8-8 घंटे के लिए डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाती है, लेकिन कुछ समय से यहां पर ड्यूटी को लेकर चल रही मारामारी के बीच नई परंपरा चल निकली है। इसमें यदि किसी डॉक्टर की ड्यूटी यदि सुबह 8 बजे तक है और सुबह 8 बजे के बाद ड्यूटी करने वाला डॉक्टर अस्पताल समय पर नहीं पहुंचा है तो रात में ड्यूटी करने वाला डॉक्टर वार्ड को खाली छोड़कर चला जाता है। ऐसे में 8 बजे के आसपास आने-वाले मरीजों को इलाज नहीं मिलता और हंगामे की स्थिति बनती है। रविवार की सुबह इसी तरह की स्थिति के कारण सिविल सर्जन डॉक्टर आरएस त्रिपाठी से बदसलूकी की गई थी। इस मामले में सीएमएचओ कहते हैं कि डॉ. वीके गुप्ता कहते हैं कि उन्हें इस तरह की अव्यवस्था की जानकारी नहीं थी। अब वे जिला अस्पताल का निरीक्षण करके स्थिति को सुधारने का प्रयास करेंगे।

भास्कर संवाददाता | छतरपुर

जिलाअस्पताल में पदस्थ डॉक्टरों के साथ बदसलूकी की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। रविवार की रात एक मरीज की मौत के बाद गुस्साए परिजनों ने यहां पर पदस्थ डॉक्टर के साथ बदसलूकी की। इससे करीब 12 घंटे पहले भी अस्पताल में मरीज की मौत के बाद हंगामा और तोड़फोड़ की गई थी।

ईशानगर थाना क्षेत्र के ग्राम खड़गांय के मुन्नालाल शर्मा ने अपने 80 वर्षीय पिता वीर बहादुर शर्मा को जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। रेडक्रॉस वार्ड में भर्ती करके डॉ. विजय पथौरिया द्वारा उनका इलाज किया जा रहा था। रविवार को डॉ. पथौरिया नहीं आए और रात में अचानक ही शर्मा की तबीयत बिगड़ गई। इस दौरान ड्यूटी पर मौजूद डॉ. सौरभ खरे को बुलाया गया, लेकिन जब तक डॉ. खरे वार्ड में पहुंचे, तब तक वीर बहादुर की मौत हा़े चुकी थी। वीर बहादुर की मौत की बात सुनते ही मौके पर कहासुनी होने लगी। इसी बीच कुछ लोगों ने डॉ. खरे पर हमला बोल दिया। किसी तरह से डॉ. खरे ने खुद को बचाया और पुलिस को मामले की जानकारी दी। सिटी कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और संदेह के आधार पर मृतक वीर बहादुर के बेटे मुन्नालाल, रामबाबू शर्मा को पुलिस ने जीप में बैठा लिया। पिता की मौत के बाद बेटों को पुलिस द्वारा पकड़े जाने से यहां पर आक्रो