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स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए बना स्पेशल वार्ड

6 वर्ष पहले
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जिलाअस्पताल में शासन के निर्देश के बाद स्वाइन फ्लू को लेकर अलर्ट है। यहां स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए अलग वार्ड तैयार किया गया है। इसमें प्रशिक्षित स्टाफ को तैनात किया गया है। हालांकि अब तक जिला अस्पताल में स्वाइन फ्लू का कोई मरीज या संदिग्ध भी नहीं आया है। लेकिन यहां स्वाइन फ्लू के प्राइमरी स्टेज के इलाज की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा सीएमएचओ कार्यालय में स्वाइन फ्लू से निपटने की तैयारियों के संबंध में बैठक भी हो रही हैं। जिला अस्पताल में पहली और दूसरी स्टेज का इलाज है। तीसरी स्टेज पर पहुंचते ही उसे ग्वालियर या अन्य शहर भेजा जाएगा। तीसरी स्टेज पर वायरस फेफड़ों को प्रभावित करता है। ऐसे में मरीज को ऑक्सीजन देने के लिए वेंटीलेटर का उपयोग होता हैं। वेंटीलेंटर नहीं होने के कारण मरीज को तुरंत ग्वालियर भेज दिया जाता है। स्वाइन फ्लू के लिए नियुक्त नोडल अधिकारी डा. विजय पथौरिया कहते हैं कि अभी तक कोई मरीज नहीं आया है। जब मरीज आएगा तो वह किसी भी स्टेज में हो उसका चैकअप किया जाएगा।

जांच के लिए मरीज के स्वाब ( गले की लार, मज्जा) टेस्ट के लिए मेडिकल कॉलेज भेजे जाते हैं। परीक्षण के बाद 24 से 26 घंटे के भीतर रिपोर्ट जाती हैं। जिले से अभी तक एक भी मरीज का स्वाब टेस्ट नहीं भेजा हैं।

3बिस्तर का वार्ड : फ्लूको लेकर जिला अस्पताल एवं स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हैं। अस्पताल एवं ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात डॉक्टरों एवं पैरामेडिकल स्टॉफ को प्रशिक्षण दिया है। अस्पताल में 3 बिस्तरों के आइसोलेशन वार्ड को स्वाइन फ्लू मरीजों के लिए आरक्षित रखा हैं। वार्ड में दवाओं के साथ नर्सिंग स्टॉफ की ड्यूटी लगाई हैं। इसकी प्रभारी सेवा गोप बताती हैं कि यहां एक से दूसरे से तीन फीट की दूरी से बेड लगाए गए हैं। बीपी मशीन, थर्मामीटर एवं स्टेथेस्कोप के दो सेट है। स्टॉफ एवं मरीजों के लिए मास्क, ग्लब्स, कैप भी वार्ड में हैं। स्वाइनफ्लू के बचाव के लिए टेबलेट हैं।

स्वाइन फ्लू

लक्षण: सामान्यएन्फ्लूएंजा के लक्षणों की तरह बुखार, तेज ठंड लगना, गला खराब होना, मांसपेशियों में दर्द होना, तेज सिरदर्द होना, खांसी आना, कमजोरी।

कारण:संक्रमितव्यक्ति का खांसने और छींकने या ऐसे उपकरणों के स्पर्श करने से, जो दूसरों के संपर्क में भी आता है, उन्हें भी संक्रमित कर सकता है।

बचाव:बार-बारअपने हाथों को साबुन या ऐसे सॉल्यूशन से धोना जरूरी होता है जो वायरस का खात्मा करते हैं। नाक और मुंह को हमेशा मॉस्क से ढंकना जरूरी है।

लक्षण: सामान्यएन्फ्लूएंजा के लक्षणों की तरह बुखार, तेज ठंड लगना, गला खराब होना, मांसपेशियों में दर्द होना, तेज सिरदर्द होना, खांसी आना, कमजोरी।

कारण:संक्रमितव्यक्ति का खांसने और छींकने या ऐसे उपकरणों के स्पर्श करने से, जो दूसरों के संपर्क में भी आता है, उन्हें भी संक्रमित कर सकता है।

बचाव:बार-बारअपने हाथों को साबुन या ऐसे सॉल्यूशन से धोना जरूरी होता है जो वायरस का खात्मा करते हैं। नाक और मुंह को हमेशा मॉस्क से ढंकना जरूरी है।

छतरपुर। जिला अस्पताल में स्वाइन फ्लू के िलए बनाया गया वार्ड।

लक्षण: सामान्यएन्फ्लूएंजा के लक्षणों की तरह बुखार, तेज ठंड लगना, गला खराब होना, मांसपेशियों में दर्द होना, तेज सिरदर्द होना, खांसी आना, कमजोरी।

कारण:संक्रमितव्यक्ति का खांसने और छींकने या ऐसे उपकरणों के स्पर्श करने से, जो दूसरों के संपर्क में भी आता है, उन्हें भी संक्रमित कर सकता है।

बचाव:बार-बारअपने हाथों को साबुन या ऐसे सॉल्यूशन से धोना जरूरी होता है जो वायरस का खात्मा करते हैं। नाक और मुंह को हमेशा मॉस्क से ढंकना जरूरी है।

छतरपुर। जिला अस्पताल के नए स्वाइन फ्लू वार्ड में सभी प्रकार की दवाइयां उपलब्ध है।