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भगवान कृष्ण से मिलने पंहुचे सखा सुदामा

6 वर्ष पहले
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कथा के चौथे दिन सुदामा प्रसंग का वर्णन िकया गया

भास्करसंवाददाता | छतरपुर

शहरमें कथा में पांचवे दिन सुदामा अपने बचपन के मित्र श्रीकृष्ण से मिलने जाते है। लेकिन भगवान के द्वारपाल बड़ी मुश्किल से उन्हें श्रीकृष्ण से मिलने देते है। भगवान भी अपने सखा से मिलते ही उनकी सारी समस्याओं को जानकर उन्हें दूर कर देते है। सोमवार को आयोजित हुई श्रीमद् भागवत कथा में आचार्य वृंदावन से आए आचार्य रामजी महाराज ने सुदामा चरित्र और कृष्ण सुदामा मिलन की कथा सुनाई। इस दौरान सभी श्रद्धालुओं की आखो से आंसू छलक आए। पं रामजी महाराज ने कहा कि सुदामा जब बहुत गरीब हो जाते घर में खाने के लिए एक वक्त का खाना भी नसीब नहीं होता है। तब उनकी प|ी भगवान श्रीकृष्ण से सहायता मांगने को कहती है। पर सुदामा मित्र से सहायता मांगने से मना कर देते है। तब उनकी प|ी उन्हें बहुत समझाती है। तब जाकर सुदामा अपने मित्र से मिलने के लिए तैयार हो जाते है। और उनकी प|ी उनके कपड़ों के छोर में थोड़ी से चावल बांध देती है। अब सुदामा एक दिन की यात्रा के बांद भगवान श्रीकृष्ण के द्वार मथुरा पहुंचते है। यहां वे पहरे दारों को भगवान का मित्र बताकर उन्हें बुलाने को कहते है। तो सभी पहरेदार उनका मजाक बनाते है। थोड़ी देर बाद भगवान श्रीकृष्ण बाहर आते है और अपने मित्र को देख उनके गले से लग जाते है। दोनों मित्र रोने लगते है। इतना देख कथा सुन रहे सभी श्रद्धालुओं की आखों में आंसू भर जाते है। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण सुदामाजी को अपने भवन ले जाते है और तमाम तरह की सुख सुविधाओं और अच्छा खानपान कराते है। फिर उनसे उनका हाल पूछते है। तब वह अपनी व्यथा सुनाते है। भगवान उनकी पोटली से दो मुठ्ठी चावल खाकर उनके सारे कष्ट हर लेते है।