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नशा मुक्ति के लिए संगोष्ठी का आयोजन

6 वर्ष पहले
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शहरके पुराना नाका के पास नरसिंह धाम मंदिर में नशा मुक्ति पर आधारित संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मप्र जन अभियान परिषद के सहयोग से प्रखर जन कल्याण समिति द्वारा आयोजित इस संगोष्ठी में लोगों ने नशा को बेहद खतरनाक बताते हुए इससे युवा पीढ़ी को बचाने पर विचार विमर्श किया गया।

नरसिंह धाम में रविवार की दोपहर हुई संगोष्ठी को संबोधित करते हुए डॉ. बहादुर सिंह परमार ने कहा कि नशा समाज में लगा वह पौधा है जो ऊपर से तो छोटा दिख रहा है लेकिन इसकी जड़ें बहुत गहरे तक पहुंच चुकी हैं। वास्तव में नशा पोलियो की बीमारी की तरह है। समाज में इस बीमारी से ग्रस्त लोगों को नशा त्यागने के लिए प्रेरित तो किया जा सकता है। लेकिन जिस तरह से पोलियो की ड्राप पोलियो ग्रस्त लोगों पर असर नहीं करती उसी तरह यह सब बातें नशा करने वालों को गलत लगती हैं। आकाशवाणी के कार्यक्रम अधिकारी दिनेश रजक ने कहा कि हमें नशा से अपनी आने वाली पीढ़ी को बचाना होगा। जिस तरह से पोलियो ड्राप पिलाई जाती है पोलियो से बचने के लिए, उसी तरह हमें नशे के सेवन से होने वाले नुकसान और कैंसर जैसी भयंकर बीमारियों के बारे में बताना होगा।

मप्र जन अभियान परिषद से संबद्ध प्रखर जन कल्याण समिति द्वारा आयोजित नशामुक्ति पर आधारित विचार गोष्ठी में प्रमोद सारस्वत, ऊषा पाठक, धर्मेंद्र सक्सेना, एडवोकेट नंद किशोर पचौरी, शीला श्रीवास्तव, प्रगति, पूजा शु्क्ला, नीलम सक्सेना, देवेन्द्र कुमार सुमन ने भी विचार गोष्ठी को संबोधित किया।

इस गोष्ठी में नशा मुक्ति के लिए संकल्प-पत्र पर हस्ताक्षर कर नशा त्यागने और समाज को नशा मुक्त बनाने के लिए सतत प्रयासरत रहने की शपथ दिलाई गई।