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भागवत कथा में हुआ रुकमणि विवाह

7 वर्ष पहले
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छतरपुर नरसिंह मंदिर में पं पंकज क्रष्ण सास्त्री के प्रवचनों का आन्न्द लेते श्रोता

भास्कर संवाददाता| छतरपुर

शहरके नरसिंह मंदिर में चल रही भागवत कथा में पांचवे दिन रुकमणि विवाह की कथा सुनाई गई। इस दौरान भगवान कृष्ण और रूकमणि की सजीव झांकी बनाकर विवाह कराया गया। श्रद्धालुओं द्वारा भगवान श्रीकृष्ण और रूकमणि विवाह के दौरान पुष्पवर्षा भी की गई।

पं. पंकज कृष्ण शास्त्री ने मंगलवार को सबसे पहले गोपी उद्धव संवाद की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि गोपियां भगवान कृष्ण के बिना ऐसे हो जाती हैं जैसे मछली पानी के बिना हो जाती है। भगवान के वियोग में गोपियां निरंतर रोती रहती है। उनका इंतजार करती हैं। इसके बाद ठाकुर जी गोकुल से मथुरा पहुंचे यहां उन्होंने कंस का वध किया। इसके बाद माता देवकी और पिता वसुदेव को कंस की कैद से आजाद कराया।

इसके बाद विवाह की कथा का वर्णन किया गया। भगवान ने रूकमणि के विनय पर उनका हरण किया और फिर विवाह किया। इस दौरान पूरे पंडाल में मौजूद दर्शकों खड़े होकर भगवान श्रीकृष्ण और रूकमणि के सजीव विवाह पर पुष्पवर्षा की और खूब नृत्य भी किया।

कथाका समापन आज

बृजधामसे आए पं. केशव कौशिक महाराज ने बताया कि बुधवार को भागवत कथा का समापन होगा। इस अवसर पर कलयुग के उपदेश, सुदामा चरित्र, नाम कीर्तन की महिमा का वर्णन की कथा सुनाई जाएगी। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार से हवन पूजन कर पूर्ण आहुति दी जाएगी। इस अवसर पर आयोजकों द्वारा विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा। कथा के व्यवस्थापक के रूप में राघवेंद्र निरंजन, लोकेंद्र सिंह पटेल और अखिलेश पटेल का भी सहयोग मिल रहा है।