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मंडी अध्यक्ष की कुर्सी फिर बृजेश राय के पास पहुंची

6 वर्ष पहले
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छतरपुरकृषि उपज मंडी के अध्यक्ष पद के लिए खींचतान फिर से शुरू हो गई है। चार माह पहले अध्यक्ष के खिलाफ हुई अविश्वास प्रस्ताव की कार्रवाई को कमिश्नर ने खारिज कर दिया है। ऐसा होने से अब पूर्व मंडी अध्यक्ष बृजेश राय दोबारा मंडी अध्यक्ष बन जाएंगे। हालांकि अभी तक श्री राय को यह प्रभार नहीं मिल सका है।

कृषि उपज मंडी छतरपुर के लिए निर्वाचित हुए अध्यक्ष बृजेश राय के खिलाफ मंडी उपाध्यक्ष भुवानीदीन मिश्रा ने 26 सितंबर 2014 को अविश्वास प्रस्ताव लाया था। इस प्रस्ताव के पास होने पर श्री मिश्रा अध्यक्ष के रूप में कार्य करने लगे थे। इसी बीच हटाए गए मंडी अध्यक्ष बृजेश राय ने मामले में कमिश्नर कोर्ट में अपील कर दी। इस मामले की सुनवाई करते हुए कमिश्नर आरके माथुर ने अविश्वास प्रस्ताव की कार्रवाई को दोषपूर्ण करार देते हुए इसे खारिज कर दिया। कमिश्नर श्री माथुर ने दैनिक भास्कर को बताया कि मंडी में 15 सदस्य होते हैं और ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव के लिए कम से कम आधे से अधिक अर्थात 8 सदस्यों का अध्यक्ष के विरुद्ध मतदान करना जरूरी था, जबकि इसमें केवल 7 लोगों ने ही अध्यक्ष के खिलाफ मतदान किया था। इसलिए कार्रवाई को खारिज किया गया है। यह आदेश लेकर बृजेश राय छतरपुर आए, लेकिन कलेक्टर डॉ. मसूद अख्तर से उनकी मुलाकात नहीं हो सकी और ही मंडी सचिव उन्हें मिले। इसलिए बृजेश को अब तक प्रभार नहीं मिल सका है।

काफीपुरानी है कुर्सी की यह लड़ाई

कृषिउपज मंडी छतरपुर का अध्यक्ष बृजेश राय को चुना गया था। श्री राय भाजपा समर्थित थे, जबकि कांग्रेस नेता भुवानीदीन मिश्रा मंडी के उपाध्यक्ष चुने गए थे। इस चुनाव में अध्यक्ष पद का फैसला भी सिक्का उछालकर किया गया था। इस तरह से बृजेश राय को अध्यक्ष चुना गया। अध्यक्ष पद पर काम करते हुए बृजेश राय ने सदस्यों को साथ लेकर चलने पर विश्वास नहीं किया।

इसका फायदा अध्यक्ष मंडी के उपाध्यक्ष भुवानीदीन मिश्रा ने उठाते हुए अध्यक्ष श्री राय के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया था। पहले प्रयास में 5 मार्च 2014 को एसडीएम कार्यालय में सम्मेलन बुलाया गया, लेकिन उसी दिन लोकसभा चुनाव आचार संहिता की घोषणा हो गई थी और सम्मेलन को स्थगित कर दिया गया था। इसके बाद अध्यक्ष बृजेश राय और उपाध्यक्ष भुवानीदीन मिश्रा ने हाईकोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं लगाई थीं। इन दोनों याचिकाओं के संदर्भ में हाईकोर्ट की डबल बैंच ने 10 सितंबर को आदेश पारित किया कि इस अविश्वास प्रस्ताव की कार्रवाई को पूरा किया जाए। इस पर 26 सितंबर को वोटिंग कराने के लिए सम्मेलन बुलाया गया। इस सम्मेलन में हुई वोटिंग में 12 में से कुल 8 सदस्य ही आए और उन्होंने वोटिंग की। मतगणना में पाया गया था कि 7 सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया और एक सदस्य ने अविश्वास प्रस्ताव के विपक्ष में वोट किया था। इस तरह से मंडी अध्यक्ष की कुर्सी बृजेश राय से छिन गई थी।

इसके करीब चार माह बाद अब कमिश्नर ने 26 सितंबर की इस कार्रवाई को दोषपूर्ण करार देेते हुए खारिज कर दिया है और दोबारा बृजेश राय को अध्यक्ष बनाने के लिए आदेश जारी किया है। इससे पहले राजनगर कृषि उपज मंडी अध्यक्ष के मामले में भी अविश्वास प्रस्ताव की कार्रवाई को भी कमिश्नर खारिज कर चुके हैं।