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एक ने भी गोद नहीं लिया छतरपुर का गांव

6 वर्ष पहले
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प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी ने सांसद आदर्श ग्राम योजना शुरू करके देश के गांवों के विकास की पहल की थी। लेकिन इस योजना के लाभ से छतरपुर जिला वंचित है।

छतरपुर जिले के मतदाताओं ने 3 सांसदों को चुनकर लोकसभा में भेजा है लेकिन किसी भी सांसद ने सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत छतरपुर जिले के गांव को गोद नहीं लिया है।

इससे जिले के ग्रामीण स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। जबकि जिले में कई गांव ऐसे हैं जहां मूलभूत सुविधाएं भी मौजूद नहीं है। काश सांसदों द्वारा इनको चयनित किया जाता तो शायद पीएम मोदी की आदर्श ग्राम की परिकल्पना पूरी तरह साकार हो पाती।

मप्र से राज्यसभा सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी ने तो सांसद आदर्श ग्राम योजना को ही नकार दिया है। उन्होंने अब तक प्रदेश का कोई भी गांव इस योजना के तहत चयनित नहीं किया है। श्री चतुर्वेदी कहते हैं कि वे एक गांव को गोद लेकर बांकी गांवों के साथ अन्याय क्यों करें। उन्होंने योजना पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने योजना तो बना दी है लेकिन उसके लिए फंड की कोई व्यवस्था नहीं की है। और जब सांसद को सांसद निधि से विकास करना है तो एक गांव क्यों, क्षेत्र के सभी गांवों का बराबरी से विकास करना चाहिए।

टीकमगढ़सांसद ने गोर का किया चयन

टीकमगढ़लोकसभा क्षेत्र में छतरपुर जिले की छतरपुर, बिजावर और महाराजपुर विधानसभा के मतदाता आते हैं। यहां से भाजपा के डा. वीरेंद्र कुमार सांसद हैं। उन्होंने अभी टीकमगढ़ जिले की जतारा विधानसभा क्षेत्र का गोर गांव को सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत चयनित किया है। वे कहते हैं गोर को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन से आदर्श गांव बनाया जाएगा। छतरपुर जिले के गांव को गोद नहीं लेने पर डा. वीेरेंद्र कुमार का कहना है कि 2019 तक तीन गांवों को आदर्श ग्राम बनाने का लक्ष्य है। गोर के बाद दूसरे चरण में छतरपुर जिले के गांव को आदर्श ग्राम के लिए चयनित करेंगे।

विकसित गांव को ले लिया गोद

खजुराहोलोकसभा क्षेत्र के तहत छतरपुर जिले की राजनगर और चंदला विधानसभा क्षेत्र आती है। यहां से भाजपा के नागेंद्र सिंह सांसद हैं। उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र के पन्ना जिले के गांव महेबा को गोद लिया है। इन्होंने गुनौर ब्लाक का यह गांव काफी विकसित है। यहां स्वास्थ्य केंद्र, हायरसेकंडरी स्कूल, उप मंडी समेत अनेक सुविधाएं पहले से ही उपलब्ध है। इस पर विरोधी उनके चयन की आलोचना भी कर रहे हैं। राजनगर और चंदला विधानसभा क्षेत्र के अविकसित गांवों की भी उन्होंने उपेक्षा की है। इस पर उनका कहना है कि आदर्श ग्राम के तहत महेबा गांव का चयन किया है लेकिन छतरपुर जिले चंदला और राजनगर विधानसभा के गांवों का विकास अन्य योजनाओं से किया जाएगा। इसमें कोई पक्षपात नहीं होगा।

तीनगांव विकसित करना है

छतरपुरजिले का बड़ामलहरा विधानसभा क्षेत्र दमोह लोकसभा क्षेत्र के तहत आता है। इसके दो नगर बड़ामलहरा और बकस्वाहा से लगे गांव काफी पिछड़े हुए हैं। वनक्षेत्र की अधिकता से यहां विकास कार्यों में काफी दिक्कतें भी आती हैं। दमोह लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के प्रहलाद पटेल सांसद हैं। उन्होंने दमोह जिले के गांव बांदकपुर को सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत चुना है। छतरपुर जिले की उपेक्षा के सवाल पर सांसद प्रहलाद पटेल का कहना है कि एक साथ सभी गांवों का विकास संभव नहीं है। वे कहते हैं कि पूरे संसदीय क्षेत्र के गांवों की चिंता उन्हें है। बड़ामलहरा क्षेत्र की भी समस्याएं दूर करेंगे।

काश इनके दिन फिर जाते

छतरपुरजिले की सभी विधानसभाओं में अनेक गांव ऐसे हैं जहां तो पहुंच मार्ग है और ही स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत आवश्यकताएं। इसके अलावा किसी गांव में पानी की कमी समस्या है तो कहीं पानी ही आफत बन जाता है। कुछ ऐसे ही गांवों की तलाश दैनिक भास्कर ने की है। ताकि जनप्रतिनिधियों की नजर इन पर पड़ जाए तो इनका भला हो सके।

1.बरसात में बन जाता है टापू: महाराजपुरविधानसभा क्षेत्र में स्थित कुर्रा ग्राम पंचायत के तहत आने वाले गनेशपुरा गांव की हालत बेहद खराब है। बारिश के दिनों में यह गांव टापू में तब्दील हो जाता है। यहां से 7 किमी. की दूरी पर गढ़ीमलहरा स्वास्थ्य केंद्र स्थित है। लेकिन इस 7 किमी. में 5 किमी. पगडंडी का रास्ता है। शिक्षा के नाम पर यहां प्राथमिक स्कूल है। 6 वीं की पढ़ाई के लिए छात्र छात्राओं को गढ़ीमलहरा जाना पड़ता है। यही हाल धीरजपुरा गांव का है।

2.और यहां पहाड़ जीतकर मिलता है पानी: इसीप्रकार जिले की बिजावर विधानसभा क्षेत्र का गांव पाठापुर है, जहां ग्रामीणों को पेयजल के लिए काफी जदृोजहद करना पड़ती है। इस गांव में ग्रामीण 6 महीने 2 किमी. दूर खड़ा पहाड़ उतरकर पीने के पानी की व्यवस्था करते हैं। इसी प्रकार बिहरवारा गांव में भी ग्रामीणों को चट्टानों से रिसने वाले पानी से पेयजल की जरूरतें पूरी करना पड़ती है। यहां एक बर्तन भरने में आधा घंटे का समय लगता है।

सिर्फ एक गोद लूं और बाकी को क्यों छोड़ दूं ?

मप्र से राज्यसभा सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी ने तो सांसद आदर्श ग्राम योजना को ही नकार दिया है। उन्होंने अब तक प्रदेश का कोई भी गांव इस योजना के तहत चयनित नहीं किया है। श्री चतुर्वेदी कहते हैं कि वे एक गांव को गोद लेकर बांकी गांवों के साथ अन्याय क्यों करें। उन्होंने योजना पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने योजना तो बना दी है लेकिन उसके लिए फंड की कोई व्यवस्था नहीं की है। और जब सांसद को सांसद निधि से विकास करना है तो एक गांव क्यों, क्षेत्र के सभी गांवों का बराबरी से विकास करना चाहिए।

टीकमगढ़सांसद ने गोर का किया चयन

टीकमगढ़लोकसभा क्षेत्र में छतरपुर जिले की छतरपुर, बिजावर और महाराजपुर विधानसभा के मतदाता आते हैं। यहां से भाजपा के डा. वीरेंद्र कुमार सांसद हैं। उन्होंने अभी टीकमगढ़ जिले की जतारा विधानसभा क्षेत्र का गोर गांव को सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत चयनित किया है। वे कहते हैं गोर को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन से आदर्श गांव बनाया जाएगा। छतरपुर जिले के गांव को गोद नहीं लेने पर डा. वीेरेंद्र कुमार का कहना है कि 2019 तक तीन गांवों को आदर्श ग्राम बनाने का लक्ष्य है। गोर के बाद दूसरे चरण में छतरपुर जिले के गांव को आदर्श ग्राम के लिए चयनित करेंगे।