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किसानों के िलए आया 25 लाख का बीज अफसरों ने बेच डाला, निचले कर्मचारियों पर की कार्रवाई, ताकि मामला दब जाए
जांच में कृषि विभाग के अफसर दोषी होने के बावजूद निचले कर्मचारियों पर कार्रवाई कर मामला दबाया
घनश्यामपटेल| छतरपुर
कृषिविभाग के अफसरों ने किसानों को नि:शुल्क बांटने आया 25.50 लाख रुपए कीमत का मूंग का बीज और अन्य सामग्री बाजार में बेच दी गई है। गर्मी मौसम में किसानों को राहत देने की प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में घपला होने की राजस्व एवं कृषि विभाग के अफसरों द्वारा की गई अलग-अलग जांच में विभाग के आला अधिकारी दोषी पाए गए हैं, लेकिन विभाग ने केवल एक आरएईओ को निलंबित कर पूरा मामला दबा दिया है। बिजावर विधायक पुष्पेंद्रनाथ पाठक और चंदला विधायक आरडी प्रजापति की शिकायत पर हुई हुई जांच के बाद रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। जिले में वर्ष 2013-14 के दौरान ओला प्रभावित क्षेत्रों में रह रहे किसानों के लिए कृषि विभाग ने विशेष राहत योजना चलाई थी। विभाग ने ग्रीष्मकालीन बुआई में एक्सलरेटिड पल्स प्रोडक्शन प्रोग्राम-3 योजना के तहत लवकुशनगर क्षेत्र के 700 किसानों को 4 किलो मूंग, बीच उपचार दवा, कीटनाशक, नींदानाशक, उर्वरक सहित सामग्री नि:शुल्क बांटने का दावा किया था। इस सामग्री के एवज में उप संचालक कृषि ने लगभग 25.50 लाख रुपए का भुगतान भी कर दिया था, लेकिन जब जांच हुई तो पता चला कि अधिकांश किसानों को कोई सामग्री वितरित ही नहीं हुई। बिजावर विधायक पुष्पेंद्रनाथ पाठक ने यह मामला विधानसभा के पिछले सत्र में उठाया था। इसके बाद जांच शुरू हुई। एक जांच कमिश्नर सागर के निर्देश पर राजस्व विभाग के अफसरों ने की जबकि दूसरी जांच संयुक्त संचालक कृषि सागर डीएल कोरी ने की। दोनों ही जांचों में कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा वित्तीय अनियमितताएं करने की बात की पुष्टि हो गई। जांच में पता चला कि 700 में 416 किसानों को सामग्री का वितरण ही नहीं हुआ। इस मामले में चंदला के आरएईओ आरके पटेल को निलंबित कर दिया गया, जबकि तीन अन्य आरएईओ के विरुद्ध विभागीय जांच बैठा दी गई है। उस समय लवकुशनगर के एसएडीओ रहे जीपी राजपूत का ट्रांसफर टीकमगढ़ हो गया था।
राजपूत को रिलीव करने के एवज में उप संचालक कृषि ने उनसे जबर्दस्ती किसानों की झूठी सूची को अनुमोदित करा लिया। राजपूत द्वारा इस तथ्य से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करा दिया है। इसके बाद यह मामला लंबे समय से कमिश्नर सागर के कार्यालय में लंबित है। हालांकि