मुर्गी के पंख से बनाया केरोटीन प्रोटीन
यहांके एक डॉक्टर का नाम अब यूरोप और ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप में वहां के प्रसिद्ध वैज्ञानिकों के बीच लिया जा रहा है।
डॉक्टर ने चिकन के पंखों से केरोटीन प्रोटीन बनाया है और इस प्रोटीन से एंटी एजिंग बनाया जा रहा है। यह क्रीम यूरोपीय देशों में सौंदर्य प्रसाधन के साथ घावों को जल्द ठीक करने के लिए प्रयोग की जाती है। डॉक्टर की दिली तमन्ना है कि वे छतरपुर में अपने हुनर से युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराएं।
डॉ.अरुण की प्रतिभा की कायल है मलेशिया सरकार : शहरके किराना व्यापारी श्याम बिहारी नौगरया के बेटे डॉ. अरुण ने यहां के क्रिश्चियन हायर सेकंडरी स्कूल से हाई स्कूल के बाद जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर से स्नातक और देहरादून से पीजी किया और फिर न्यूजीलैंड चले गए। वहां उन्होंने पीएचडी के साथ लकड़ी और उससे बनने वाली सामग्री पर शोध किया। वे वर्तमान में यूनिवर्सिटी मलेशिया यहांग में एसोसिएटिड प्रोफेसर हैं और अब तक 40 मेडल पा चुके हैं।
समस्याके निजात के साथ पाई सफलता :डॉ. अरुणने मलेशिया को एक कठिन समस्या से निजात दिलाई है। डॉ. अरुण ने बताया कि मलेशिया में चिकन भोजन में शामिल है। ऐसे में यहां चिकन के पंख बड़ी मात्रा में निकलते हैं जिन्हें ठिकाने लगाना बड़ी समस्या थी।
उन्होंने चिकन के पंखों से केरोटीन प्रोटीन बनाने का तरीका इजाद किया है। इससे केवल समस्या से निजात मिली बल्कि केरोटीन प्रोटीन का प्रयोग एंटी एंजिंग क्रीम में किया जा रहा है।
उन्होंने कहा एंटी एंजिंग क्रीम का प्रचलन फिलहाल इंडिया में कम है लेकिन यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में बहुत है। उन्होंने बताया कि इन देशों में एंटी एंजिंग क्रीम का प्रयोग सौंदर्य प्रसाधन के साथ ही घाव को जल्द भरने में किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों को मिले लाभ
डॉ.अरुण गुप्ता मलेशिया और न्यूजीलैंड में भले ही सम्मान पा रहे हों लेकिन उन्हें इस बाद का मलाल है कि वहां सब कुछ होने के बाद भी अपने लोग नहीं है। डॉ. गुप्ता की दिली इच्छा है कि उन्हें अगर प्रदेश सरकार संसाधन मुहैया कराए तो वे छतरपुर और आसपास के जिलों में एंटी एंजिंग क्रीम का प्लांट लगाकर यहां के युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराएंगे।
डॉ. अरुण नौगरया