पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • 81 लाख खर्च फिर भी किसानों को नहीं मिला फायदा

81 लाख खर्च फिर भी किसानों को नहीं मिला फायदा

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
जिलेमें कृषि महोत्सव के आयोजन में शासन से मिले लगभग 81 लाख रुपए की राशि में व्यापक अनियमितताएं की गई हैं। यह खुलासा भले ही किसानों द्वारा की गई शिकायतों के आधार पर हुआ हो लेकिन संयुक्त संचालक कृषि के निरीक्षण में भी इस तथ्य की पुष्टि हुई है कि गांवों में लगे शिविरों की व्यवस्था दयनीय थी। महोत्सव से किसानों का कम और विभाग के स्टाफ का ज्यादा भला हुआ है।

प्रदेश में 25 सितंबर से 20 अक्टूबर तक कृषि महोत्सव आयोजित किया। इसके तहत 81.60 लाख रुपए की राशि छतरपुर जिले को मिली थी। कृषि विभाग और आत्मा परियोजना संचालक को कलेक्टर के निर्देश पर इस राशि को खर्च करना था। लाखों रुपए खर्च होने पर भी किसानों को इस महोत्सव का कोई लाभ नहीं हुआ है। महोत्सव का उद्देश्य किसानों को खेती की नई तकनीक से अवगत कराना था। साथ ही खाद-बीज की उन्नत किस्मों की जानकारी देना था, लेकिन महोत्सव के दौरान ऐसा कुछ नहीं हुआ। किसानों ने इस संबंध में दो दर्जन से अधिक शिकायतें की हैं।

81लाख मिले 76 लाख खर्च

महोत्सवमें तीन दिवसीय मेले के लिए दस लाख, ब्लाक में संगोष्ठी के लिए एक लाख के मान से आठ ब्लाकों में 8 लाख रुपए, जिले में प्रचार-प्रचार के लिए दस लाख रुपए, ब्लाक में एक विकास रथ के लिए डेढ़ लाख रुपए के मान से आठ ब्लाकों में 12 लाख रुपए का बजट मिला था। कृषि रथ को हर दिन तीन गांवों को कवर करके हर गांव में पांच हजार रुपए खर्च कर गोष्ठी करना था। यानि हर दिन रथ को 15 हजार रुपए खर्च कर किसानों को उसमें चाय, नाश्ता या भोजन कराना था। 26 दिन के महोत्सव में हर ब्लाक में 3.90 लाख रुपए की राशि का एडवांस वितरण विभाग ने दर्शाया है। इस हिसाब से आठ ब्लाकों के गांवों में कृषक संगोष्ठी के लिए विभाग ने 31.20 लाख रुपए एडवांस बांट दिए। कृषि महोत्सव के लिए छतरपुर जिले को 81.60 लाख रुपए मिले थे, जिसमें से करीब 76 लाख रुपए खर्च हो गए हैं। मप्र किसान संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र सर्राफ और किसान नेता महेश प्रजापति ने बताते हैं कि कि आरएईओ को आयोजनों के लिए एडवांस राशि का वितरण ही नहीं हुआ। बिजावर, चंदला विधायक ने इस राशि के दुरुपयोग को लेकर आरोप भी कृषि विभाग पर लगाए हैं। इन शिकायतों से चिंतित होकर पन्ना और टीकमगढ़ जिलों में कलेक्टरों ने एक कमेटी का गठन कर कृषि विभाग के बिल, वाउचरों का सत्यापन कराया है, लेकिन छतरपुर जिले में यह भी