तालाब का अस्तित्व बचाने किया प्रदर्शन
ग्वाल मगरा तालाब का अस्तित्व खतरे में
छतरपुर|शहरके चौक बाजार संकट मोचन मार्ग पर स्थित चंदेल कालीन ग्वाल मगरा तालाब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। पूरे तालाब में लगभग दो से तीन फिट ऊंचाई वाले जलकुंभी के फैल जाने से एक बूंद पानी भी नजर नहीं रहा है। यह जलकुंभी सिर्फ तालाब के पानी को अनुपयोगी कर चुकी है बल्कि तालाब में ही सड़ने से मच्छरों और बीमारियों का प्रकोप भी पूरे क्षेत्र के आधा दर्जन वार्डों में फैल रहा है। तालाब के किनारे बसे लगभग 20 हजार लोग तालाब की गंदगी और बदबू से जूझ रहे हैं। पूर्व में जिला प्रशासन और शहर के सामाजिक संगठनों के द्वारा तालाब के शुद्धिकरण के लिए प्रयास किए गए लेकिन इससे तालाब की सफाई का स्थाई उपाय नहीं हुआ।
तालाब को बचाने के लिए बुधवार को सिघाड़ी नदी संघर्ष समिति और ग्वाल मगरा तालाब सुधार समिति के सदस्यों ने कलेक्टर डॉ. मसूद अख्तर को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में समिति के सदस्यों ने बताया कि ग्वाल मगरा तालाब सिर्फ ऐतिहासिक महत्व का तालाब है अपितु तालाब से 6 वार्डों का जलस्तर भी सुधरता है। पानी होने के कारण तालाब चारों तरफ से सिमट रहा है। कलेक्टर स्वयं तालाब का निरीक्षण करें और इसे बचाने के लिए आगे आएं।
सिघाड़ी नदी संघर्ष समिति के अध्यक्ष राजेन्द्र अग्रवाल ने कहा कि विगत वर्ष 7 अगस्त 2013 को जनसुनवाई में ही सिघाड़ी नदी संघर्ष समिति और ग्वाल मगरा तालाब के आसपास रहने वाले लोगों ने कलेक्टर के समक्ष यह विषय उठाया था किंतु इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। यदि अब भी तालाब को बचाने के प्रयास नहीं हुए तो इसका विलुप्त होना तय है। ऐसी स्थिति में संघर्ष समिति के सदस्य स्थानीय लोग कलेक्टर कार्यालय के समक्ष आमरण अनशन करेंगे। समिति की पूरी बात सुनकर कलेक्टर ने समिति के सदस्यों को आश्वस्त किया कि वे शुक्रवार को नगर पालिका के अधिकारियों को बुलाकर इस मामले की समीक्षा करेंगे एवं तालाब को बचाने के प्रयास किए जाएंगे। इस अवसर पर मोहम्मद करीम, हरिशचंद्र रावत, मनोज अग्रवाल, अंकुर यादव सहित कई लोग उपस्थित रहे।