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एनजीटी ने कहा, मूल आदेश में बदलाव नहीं

7 वर्ष पहले
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किशोरसागर तालाब के मामले में एनजीटी के सामने रघुवीर सरन लाल निगम ने कैविएट दायर की थी। श्री निगम की ओर से एडवोकेट धरमवीर शर्मा पेश हुए। उन्होंने कैविएट में कहा कि खसरा नंबर 3111 और 3118 की जमीन का हिस्सा नो कंस्ट्रक्शन जोन में आता है। इस जमीन पर ग्रीन बेल्ट के विकास के लिए वे यहां पर पौध रोपण करने की अनुमति चाहते हैं। उन्होंने फोरम को यह भी बताया कि इस संबंध में एक आवेदन उन्होंने कलेक्टर छतरपुर को भी दिया था, लेकिन कलेक्टर ने अब तक कोई फैसला नहीं दिया है। इस मामले में एनजीटी ने आदेश जारी किया है। इस आदेश में एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि किशोर सागर तालाब में 7 अगस्त 2014 को जारी मूल आदेश यथावत रहेगा। नो कंस्ट्रक्शन जोन में वे ही पौधे रोपे जाएं, जो वहां पनप सकें। इसके लिए पौधों की किस्मों की सूची जिला प्रशासन और वन विभाग को प्रस्तुत की जाए। वन विभाग की अनुमति के बाद ही लोगों के द्वारा पौध रोपण किया जा सकेगा। एनजीटी के इस फैसले पर अजय लाल निगम ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने उनकी मांग को गंभीरता से नहीं लिया था, लेकिन एनजीटी ने उनकी मांग को सकारात्मक रूप से लेते हुए नो कंस्ट्रक्शन जोन में पौधरोपण की अनुमति दी है।

एसडीएम डीपी द्विवेदी से सीधी बात

:क्याकिशोर सागर तालाब मामले में एनजीटी ने कोई नया आदेश जारी किया है।

- अब तक तो मुझे ऐसे किसी आदेश की जानकारी नहीं है।

:आपलगातार मामले को टाल रहे हैं। इससे लोग परेशान हैं, क्या इससे एनजीटी के आदेश की भी अवमानना हो रही है।

- चुनाव और राजस्व के कुछ जरूरी कामों की वजह से देरी हुई है। हम माननीय न्यायालय के आदेश की समय सीमा में कार्रवाई करेंगे।

:एनजीटीने तो आपको एक मानसून सत्र की समय सीमा दी है, क्या आपने अपनी ओर से इस काम के लिए कोई समय सीमा तय की है।

- हां हम 30 सितंबर तक एफटीएल और नो कंस्ट्रक्शन जोन के सीमांकन और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी कर लेंगे।

:क्याएफटीएल के निर्धारण के लिए आपने कोई पैमाना तय किया है

- पीएचई और जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों की मदद से एफटीएल का निर्धारण किया जाएगा।