श्रीराम ने किया अहिल्या का उद्धार
रामलीला देखने के लिए उमड़ पड़ी भक्तों की भीड़
भास्करसंवाददाता|छतरपुर
श्रीअन्नपूर्णा रामलीला के रंगमंच के पांचवें दिन अहिल्या उद्धार, नगर दर्शन और पुष्प वाटिका की लीला का मंचन किया गया। इसमें अनेक प्रकार के सीन-सीनरी और स्थानीय कलाकारों की कला आकर्षण का केंद्र रही। लीला के मंचन में दर्शकों को पूरी लीला में श्रृंगार रस की अनुभूति होती रही। लीला के प्रथम दृश्य में जब राजा जनक की पुत्री के विवाह के लिए उनका मंत्री गुरू विश्वामित्र को आमंत्रित करने के लिए आश्रम आते हैं, तब गुरू विश्वामित्र उनका आमंत्रण स्वीकार करते हुए भगवान राम और लक्ष्मण सहित जनकपुरी के लिए प्रस्थान करते हैं। रास्ते में गौतम ऋषि का आश्रम मिलता है जिसके सामने एक पत्थर की मूर्ति के रूप में गौतम ऋषि की प|ि अहिल्या दिखाई पड़ती हैं, भगवान राम द्वारा जब इस शिला के बारे में गुरू विश्वामित्र से पूंछा जाता है तो वे पूरा वृतांत बताकर कहते हैं कि जब तक वे स्वयं इस पत्थर को अपने पैरों से नहीं छूते हैं तब तक इस पत्थर के रूप में स्थापित अहिल्या का उद्धार नहीं होगा। यह सुनकर राम ने गुरू से कहा कि वे क्षत्रिय हैं और अपने पैरों से किसी नारी का अपमान नहीं कर सकते हैं, खासतौर से इस पत्थर की मूर्ति का क्योंकि गौतम ऋषि जाति से ब्राम्हण थे और वे ब्राम्हण की प|ि को पैरों से कभी नहीं छू सकते। विश्वामित्र समझाते हैं कि जब तक वे शिला को अपने पैरों की अनुभूति नहीं कराएंगे तब तक अहिल्या का उद्धार नहीं होगा तब जाकर भगवान श्रीराम शिला के उपर पैर रखकर अहिल्या का उद्धार करते हैं। रामलीला देखने बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।
मंच पर इस तरह का मंचन देखकर भक्तगण भावविभोर हो उठे।