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अब पहाड़ों ने रोक लिया खजुराहो और पन्ना रेल का रास्ता

6 वर्ष पहले
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{नियमानुसार 3 किमी लंबी सुरंग बनाई जा सकती है

{अब विकल्पों पर विचार

भास्करसंवाददाता | छतरपुर

खजुराहोऔर पन्ना को रेल सेवा से जुड़ने का सपना देखने वाले लोगों के लिए फिलहाल बुरी खबर है। इस रेल लाइन के रास्ते में अब पहाड़ अड़चन बन रहे हैं। पहाड़ों से होकर रेल लाइन गुजारने पर 11 किमी लंबी सुरंग बनानी पड़ सकती है, जबकि नियमों के अनुसार केवल 3 किमी लंबी सुरंग बनाई जा सकती है। ऐसे में अब रेल लाइन के लिए किए जा रहे सर्वे में दूसरे विकल्पों पर विचार किया जाएगा। ललितपुर-सिंगरौली रेल लाइन के तहत अब छतरपुर तक ट्रेन आने की उम्मीद इस साल पूरी होने की उम्मीद है और आगामी वर्ष में यह ललितपुर से खजुराहो तक ट्रेन पहुंचने की उम्मीद है।

इस तरह से खजुराहो तो छतरपुर और ललितपुर तक रेल मार्ग से जुड़ जाएगा, लेकिन पन्ना को खजुराहो से जोड़ने की संभावनाएं अभी तक पूरी होती दिखाई नहीं दे रही हैं। खजुराहो-पन्ना रेल लाइन के लिए रेलवे द्वारा किए जा रहे सर्वे के दौरान काफी अड़चनें सामने आईं हैं और फिलहाल इनका समाधान निकलता दिखाई नहीं दे रहा है। रेलवे के डीसी राजेश मंडलोई बताते हैं कि खजुराहो से पन्ना तक जो रेल लाइन प्रस्तावित है, उसकी लंबाई 47 किमी है। इसके लिए सर्वे का काम शुरू हुआ था और अब लगभग पूरा हो चुका है।

इस सर्वे में आया है कि इस रेल लाइन को पहाड़ों से होकर गुजारना पड़ेगा और इसके लिए 11 किमी लंबी टनल या सुरंग बनानी पड़ेगी। श्री मंडलोई के अनुसार इतनी बड़ी सुरंग बनाना संभव नहीं हैं और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा मानक भी ऐसा करने की अनुमति नहीं देते हैं। इसलिए अब इस सुरंग को बनाने के बजाए अन्य विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।

पहलेबाघ और अब पहाड़ रोक रहे ट्रेन

खजुराहोसे पन्ना के बीच रेल लाइन ले जाने में अड़चनों की कहानी काफी पुरानी है। इस रेल लाइन के लिए सर्वे आदि का काम पहले पन्ना नेशनल पार्क के बाघ संरक्षण कार्यक्रम के चलते रुके रहे। बाघों को इस रेल लाइन के चलते नुकसान होने की आशंकाओं का हवाला देते हुए रेल को गुजारने की अनुमति नहीं मिली, लेकिन पिछले वर्ष पन्ना नेशनल पार्क और रेलवे के अधिकारियों के बीच नेशनल पार्क के बफर जोन से गुजारने के लिए सर्वे करने पर सहमति बन गई। इसके चलते रेलवे ने सर्वे कार्य शुरू किया। इसमें केन नदी पर करीब 400 मीटर लंबा पुल बनाया जाना है। रेलवे लाइन के लिए डीपीआर तैयार होने के बाद इसे वन्य जीव संरक्षण संबंधी मंत्रालय और वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजा जाएगा। वहां से स्वीकृति के बाद ही रेल लाइन के लिए काम शुरू हो सकेगा।

सुरंग बन भी गई तो होगी परेशानी

रेलवेद्वारा वर्तमान में कराए गए सर्वे में पन्ना से खजुराहो की ओर करीब डेढ़ किमी बाद से ही पहाड़ शुरू हो जाते हैं। इस रास्ते में करीब 11 किमी दूरी तक पहाड़ ही पहाड़ हैं। इन पहाड़ों की ऊंचाई समुद्र तल से काफी अधिक होने के कारण ट्रेन काे केवल सुरंग बनाकर ही गुजारा जा सकता है। अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार केवल 3 किमी लंबी सुरंग बनाई जा सकती है। इससे अधिक बड़ी सुरंग के कारण दुर्घटनाओं आदि की स्थिति में राहत पहुंचाने में खासी परेशानी होगी। इसलिए यह सुरंग बनाने के बजाए दूसरे विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।