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प्रभातफेरी के साथ हुआ शुभारंभ

7 वर्ष पहले
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रामजन्म की लीला देख भाव विभोर हुए दर्शक

लाल कड़क्का रामलीला का शुभारंभ हुआ

शहर के रामचरित मानस मैदान में चल रही मां अन्नपूर्णा रामलीला में श्रीराम जन्म और उनकी बाललीला का मंचन किया गया। इसका जीवंत मंचन देखकर दर्शक भावविभोर हो गए। लीला के मंचन के बीच में संगीतमयी ढंग से गाई गई चौपाइयों ने आकर्षण बढ़ा दिया।

रामलीला में रावण के अत्याचार से परेशान राजा इंद्र और सभी देवता भगवान विष्णु की शरण में जाते हैं, तब भगवान विष्णु उन्हें आश्वासन देते हैं कि वे बहुत जल्द अयोध्या के राजा दशरथ के यहां पुत्र रूप में जन्म लेकर उनके संकटों को दूर करेंगे। तीसरे दिन की लीला के पहले दृश्य में राजा दशरथ अपने महलों में उदास अवस्था में बैठकर मन ही मन सोचते हैं कि में इतने बड़े राज्य का राजा हूं और मेरी तीन रानियां हैं लेकिन अभी तक कोई संतान नहीं हैं। इस समस्या के समाधान के लिए राजा दशरथ गुरू वशिष्ट के पास जाते हैं, गुरू वशिष्ट उन्हें श्रृंगी ऋषि के पास भेजते हैं। श्रृंगी ऋषि उन्हें एक पात्र में खीर देकर तीनों रानियों को खिलाने के लिए कहकर अंर्तध्यान हो जाते हैं। कुछ दिनों बाद राजा दशरथ को राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघन के रूप में चार संतानों की प्राप्ति होती है। भगवान श्रीराम के जन्म लेते ही अयोध्या में खुशियां मनाई जाती हैं, भगवान शंकर भी कैलाश पर्वत से अपने नंदी गणों के साथ भगवान श्रीराम से मिलने अयोध्या पहुंचते हैं। गुरू वशिष्ट जी राजा दशरथ के चारों पुत्रों को धनुर्विद्या का पाठ पढ़ाकर उन्हें धनुर्विद्या में निपुण बनाते हैं। श्री अन्नपूर्णा रामलीला के मंच पर राजा दशरथ का अभिनय अवध ताम्रकार और बाॅबी सिंह ने कौशल्या का अभिनय किया। सौरभ तिवारी ने भगवान विष्णु का अभिनय किया वहीं श्रृंगी ऋषि का अभिनय पूर्व में हनुमान का रोल अदा करने वाले रामनिवास त्रिपाठी ने किया।

छतरपुर में श्रीराम जन्म की लीला के एक दृश्य में प्रस्तुतियां देते कलाकार