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गड़बड़ी करने पर राशन विक्रेता को जेल भेजा गया

7 वर्ष पहले
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राशनवितरण में गड़बड़ी करने वाले लोगों के लिए बुरी खबर है। एक राशन दुकान संचालक पर अनोखी कार्रवाई करते हुए कलेक्टर डॉ. मसूद अख्तर ने उसे जेल भेज दिया है। इस कार्रवाई से राशन की हेराफेरी करने वाले लोगों के बीच हड़कंप की स्थिति बन गई है।

दरअसल ऊजरा गांव की शासकीय उचित मूल्य दुकान से राशन की कालाबाजारी की शिकायत मिली थी। इस मामले की जांच करने के लिए 27 अक्टूबर 2014 को आईएएस अधिकारी गिरीश मिश्रा मौके पर पहुंचे। उन्होंने यहां की महिला बहुद्देश्यीय सहकारी समिति मर्यादित द्वारा संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकान में छापेमारी की। यहां पर विक्रेता कृष्ण कुमार द्विवेदी से रिकाॅर्ड की छानबीन की गई तो सामने आया कि विक्रेता द्वारा अगस्त, सितंबर, अक्टूबर माह में हितग्राहियों को खाद्यान, शक्कर, नमक और कैरोसिन का वितरण नहीं किया गया था। जांच में सामने आया कि कैरोसिन की ब्लैक मार्केटिंग की गई और फर्जी वितरण पंजी बनाकर प्रशासन को गुमराह करने की कोशिश की गई। जांच के दौरान श्री मिश्रा को यह भी पता चला कि विक्रेता द्वारा हितग्राहियों को जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया जाता था। इस तरह से सार्वजनिक वितरण प्रणाली बुरी तरह से प्रभावित हुआ। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर डॉ. मसूद अख्तर ने सोमवार को आदेश जारी किया कि राशन विक्रेता को 6 माह तक के लिए जिला जेल में बंद रखा जाए। कलेक्टर डॉ. अख्तर द्वारा यह आदेश चोर बाजारी और आवश्यक वस्तु प्रदाय अधिनियम की धारा 3 के तहत किया गया है।

अपनीतरह की पहली कार्रवाई

आवश्यकवस्तु अधिनियम और चोर बाजारी अधिनियम के तहत जिले में यह पहली कार्रवाई है। अब तक जिले के किसी भी कलेक्टर ने राशन वितरण में गड़बड़ी करने पर इतनी बड़ी कार्रवाई नहीं की है। इस कार्रवाई से राशन माफियाओं में हड़कंप की स्थिति बन रही है। वहीं कलेक्टर डाॅ. अख्तर का कहना है कि इसी तरह के अन्य मामलों में समिति प्रबंधक और सेल्समैन भी जेल भेजे जाएंगे। इसके लिए अब निगरानी और जांच की प्रक्रिया को कड़ा किया जा रहा है।

आगेक्या

इसमामले में कलेक्टोरेट के विधि अधिकारी एडीपीओ केके गौतम बताते हैं कि जिन धाराओं के तहत कलेक्टर द्वारा यह कार्रवाई की गई है, वह धाराएं रासुका की तरह सख्त हैं। इनकी अपील जिला न्यायालय में नहीं होती है। इसके लिए अपील भोपाल में बैठने वाले सलाहकार बोर्ड में की जा सकेगी