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जांच समिति की सिफारिश के बाद भी निरस्त नहीं हुई प्रक्रिया

7 वर्ष पहले
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स्वास्थ्यविभाग में हुई वार्ड सर्वेंट की भर्ती में गड़बड़ी होने की शिकायत को लेकर एक आवेदक पिछले 6 साल से इंसाफ की लड़ाई लड़ रहा है। उसने इस संबंध में पीजी सेल, कलेक्टर समेत सभी अधिकारियों को शिकायत भी की लेकिन उसे अब तक इंसाफ नहीं मिल सका है। उसकी शिकायत पर प्रशासन ने जांच कराई। जांच अधिकारी ने भी भर्ती प्रक्रिया निरस्त करने की सिफारिश की थी लेकिन अब तक भर्ती को निरस्त नहीं किया गया।

शिकायतकर्ता रामदास कुशवाहा ने बताया कि जून 2008 में स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियमित कंटाजेंसी चतुर्थ श्रेणी की भर्ती के लिए कार्रवाई शुरू थी। इसके लिए 10 आवेदको को काल लेटर जारी किए गए थे। साक्षात्कार के बाद एकजाई मूल्यांकन पत्रक में मेरिट के आधार पर चयन किया गया। रामदास ने बताया कि उसका मेरिट में चौथे नंबर पर नाम था लेकिन चयन समिति ने पांचवे नंबर पर आने वाले आवेदक का चयन कर दिया। इस पर रामदास ने मामले की शिकायत की। शिकायत के बाद जांच तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर एमजी गुप्ता से कराई गई। उन्होंने जांच में पाया कि चयन के लिए होने वाले इंटरव्यू के दो दिन पहले ही चयन समिति में परिवर्तन कर दिया गया।

पहले चयन समिति के अध्यक्ष डा. एचपी अग्रवाल थे लेकिन बाद में डा.एसके शर्मा को चयन समिति का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया। जांच में चयन समिति में परिवर्तन के औचित्य को संदेहस्पद बताया गया। पूरी जांच के बाद तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर एमजी गुप्ता ने पूरी चयन प्रक्रिया को निरस्त करने की सिफारिश की थी। रामदास ने बताया कि अब तक प्रक्रिया को निरस्त नहीं किया गया। उसने समाधान आनलाइन और जनसुनवाई में भी इस संबंध में शिकायत कर दी है। साथ ही कार्रवाई की मांग की है।