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राजनगर मंडी अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास की कार्रवाई निरस्त
राजनगर कृषि उपज मंडी के अध्यक्ष चुनने को लेकर चल रही प्रक्रिया को बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस समर्थित मानी जा रही हैं अध्यक्ष आशा यादव के खिलाफ हुए अविश्वास प्रस्ताव की कार्रवाई को अवैध करार दिया गया है। कमिश्नर ने इसे निरस्त करते हुए आदेश जारी किए हैं। इस तरह से अब कांग्रेस की आशा यादव राजनगर मंडी अध्यक्ष बनी रहेंगी।
कृषि उपज मंडी अध्यक्ष के रूप में कांग्रेस समर्थित आशा यादव को चुना गया था। चुनाव के समय भाजपा नेता और वर्तमान में मंडी उपाध्यक्ष अजय मिश्रा ने भाजपा समर्थित प्रत्याशी गीता कुशवाहा के खिलाफ काम किया था और कांग्रेस की जीत हुई थी। अजय मिश्रा को भाजपा से निष्कासित किया गया और फिर वापसी भी करा ली गई। अब भाजपाइयों ने मिलकर मंडी अध्यक्ष श्रीमती यादव के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला दिया था। 14 अगस्त 2014 को मंडी परिसर में हुए सम्मेलन में 8 सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया। इस तरह से आशा यादव को पद से हटाते हुए मंडी अध्यक्ष का प्रभार उपाध्यक्ष अजय मिश्रा को दे दिया गया था। अब अध्यक्ष पद के चुनाव की तैयारियां की जा रही थीं। इसके लिए 15 सितंबर को वोटिंग होनी है। इसकी तैयारी में प्रशासन लगा हुआ था। भाजपा के दो गुट भी श्री बाई पटेल और पूर्व प्रत्याशी गीता कुशवाहा को अध्यक्ष बनाने की तैयारी में हैं, लेकिन इसी बीच निवर्तमान अध्यक्ष आशा यादव को कमिश्नर कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कमिश्नर योगेंद्र शर्मा ने अविश्वास प्रस्ताव की पूरी प्रर्किया को विधि विरुद्ध और दूषित माना है। इस कार्रवाई को निरस्त करते हुए कलेक्टर और मंडी समिति राजनगर को आदेश के पालन के लिए लिखा है।
कमिश्नर ने 8 में 5 मतपत्रों को निरस्त किया
आशारानीयादव के वकील केएस पटैरिया ने न्यायालय में तर्क रखते हुए बताया कि अविश्वास प्रस्ताव की कार्रवाई के दौरान डाले गए मतपत्रों को खोला गया तो मतपत्र क्रमांक 1, 7 और 8 पर सही का निशान लगा था, जबकि मतपत्र क्रमांक 6, 5, 3, 2, 4 में सही का निशान नियमों के अनुसार ठीक ढंग से लगा नहीं पाया गया है। पीठासीन अधिकारी द्वारा इन मतपत्रों को निरस्त नहीं किए जाने की बात सामने आई। इस तरह के परीक्षण से यह सामने आया कि 8 मतपत्रों में से केवल 3 मतपत्र ही अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में थे। शेष मतपत्र निरस्त करने योग्य हैं। इसके अलावा अविश्वास प्रस्ताव की सूचन