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चेतगिर काॅलोनी स्थित हनुमान मंदिर में संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ

7 वर्ष पहले
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कलश यात्रा के साथ शुरू हुई भागवत कथा

छतरपुर चेतगिरिकॉलोनी में कलश यात्रा के साथ भागवत कथा का शुभारंभ किया गया।

भास्कर संवाददाता.छतरपुर

चेतगिरकालोनी स्थित हनुमान मंदिर में आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का कलश यात्रा के साथ शुभारंभ किया गया। पहले दिन शनिवार को 3 बजे कथा स्थल से भव्य कलश शोभा यात्रा बैंड-बाजों के साथ जवाहर मार्ग, चेतगिर कालोनी एवं सीताराम कालोनी के मुख्य मार्गों से गुजरी। विशाल शोभा यात्रा में महिलाओं ने बढ़-चढक़र हिस्सा लिया। कलश यात्रा वापस मंदिर पहुंची जहां पर कथा का शुभारंभ किया गया।

डीजे की धुन पर थिरकते बच्चे और वृद्धों का उत्साह देखते ही बनता था। बग्गी पर सवार आचार्य श्री कौशिक जी सवार थे। शोभा यात्रा पश्चात श्रीमद् भागवत कथा प्रारम्भ हुई तो भक्तगण मंत्रमुग्ध होकर श्रीकृष्ण की लीलाओं पर केन्द्रित भागवत कथा का अमृतपान करने लगे। श्रीमद भागवत कथावाचक भगवती प्रसाद जी कौशिक ने कहा कि भागवत को संत और भगवंत का एकत्र होना माना गया है। जहां इनके एकत्र होने से कल-कल रूपी गंगा की लहर तरंगें लेने लगती हैं। निष्पंद शरीर में एक स्फूर्ति का संचार होने लगता है। धर्म और अधर्म का भेद स्पष्ट होने लगता है। पाप और पुण्य की पहचान होती है। इसे ही भागवत कथा कहा गया है।

भागवतकथा का महत्व बताया

श्रीधाम वृंदावन निवासी भागवत कथावाचक श्री कौशिक जी ने भागवत कथा के महत्व को बतलाते हुए कहा कि भागवत में भक्त और भगवान की कथा के अतिरिक्त कुछ है ही नहीं। जो अपने भक्त का उद्धार कर दे वही भागवत है। उन्होंने चार अक्षरों से सुशोभित भागवत की व्याख्या करते हुए कहा कि मनुष्य को गुरू की कृपा प्राप्त हो जाए, गुरू के मुखारबिन्द से भागवत कथा सुनने को अवसर मिल जाएं, कथा स्थल हेतु कोई पावन क्षेत्र हो, किसी जल स्रोत का किनारा या मंदिर हो और सात-पांच अपने सहयोगी हो तब इस कथा का पान किया जाए तो भाग्य की प्राप्ति होती है, परमात्मा के स्वरूप के दर्शन होते हैं और निरन्तर उनके चिन्तन का ख्याल रहता है। गौरतलब है कि यह संगीतमयी भागवत कथा प्रतिदिन दोपहर दो बजे से प्रारंभ होकर शाम सात बजे तक चलती है।

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