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प्रहलाद की भक्ति देख आनंदित हुए श्रद्धालु
शहरमें सागर रोड पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा की तीसरे दिन भक्त प्रहलाद की कथा सुनाई गई। इस अवसर पर आयोजकों द्वारा भक्त प्रहलाद की झांकी बनाई गई। रविवार को हुई कथा में अयोध्या से आए पंडित रामजी महाराज ने कहा कि भक्त प्रहलाद जन्म से ही भगवान हरि के चिंतन करते थे। जब उन्हें पहली बार शिक्षा के लिए गुरू आश्रम भेजा गया तो उन्होंने देखा कि आश्रम में उनके पिता हिरण कश्यप को भगवान मानकर पूजा की जाती है। इस पर उन्होंने आश्रम के सभी छात्रों को भगवान नारायण की प्रतिमा रख उनकी भक्ति करने काे कहा। भक्त प्रहलाद सभी शिष्यों से बोले केवल हरि की भक्ति से ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। इससे सभी छात्र प्रहलाद के कहे अनुसार भगवान हरि की भक्ति में लीन हो गए। गुरुकुल के आचार्य ने प्रहलाद की शिकायत राजा हिरण कश्यप से की। तो राजा ने प्रहलाद को घर बुला लिया और वे प्रहलाद द्वारा उनकी भक्ति नहीं करने पर अत्यन्त क्रोधित हुए। और उसे म़ृत्यू दंड देने का आदेश दे दिया। प्रहलाद को गहरी खाई में फेंक दिया गया। लेकिन उसने भगवान हरि का ध्यान करना नहीं छोड़ा। इससे प्रहलाद को एक खरोच भी नहीं लगी और वह अपने घर गया। हिरण कश्यप ने दोबारा उसे जहर देकर, आग में जलाकर, गर्म लोहे से मारने का प्रयास किया। लेकिन हरि भक्ति के आगे उसके सारे प्रयास विफल रहे। तब राजा ने प्रहलाद के कहने पर खंबे को तोड़ा। तो उस में से भगवान नारायण नरसिंह अवतार में प्रकट हुए। और भगवान ने बृम्हाजी के वरदान को ध्यान में रखते हुए हिरण कश्यप का वध कर दिया। पं राजी महाराज ने कहा कि कलयुग में भी भगवान की भक्ति ही मोक्ष का एक मात्र साधन है। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
श्रीमद् भागवत कथा में कथा सुनते श्रद्धालु।