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सुदामा से गले मिलते ही रो पड़े भगवान

7 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता| छतरपुर

शहरके नरसिंह मंदिरा में चल रही श्रीमद भागवत कथा का बुधवार को समापन हो गया। कथा के समापन पर वैदिक मंत्रोच्चार से हवन पूजन कर आहुतियां दी गईं। इसके बाद भंडारे का आयोजन भी किया गया। भंडारे में प्रसाद लेने बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

अंतिम दिन हुई कथा में पं. पंकज कृष्ण शास्त्री ने सुदामा के जीवन चरित्र का वर्णन सुनाया। उनकी भगवान कृष्ण के साथ गुरू कुल की शिक्षा और उसके बाद गृहस्थ जीवन की कहानी बताई। उन्होंने बताया कि सुदामा अपने गृहस्थ जीवन में अत्यंत दुख में होते हैं घर में खाने का एक दाना भी नहीं होता। तब उनकी प|ी उन्हें सखा कृष्ण से मिलने को कहती है, लेकिन सुदामा जाने को राजी नहीं होते। जब प|ी बार-बार कहतीं हैं तो वे जाने को तैयार हो जाते हैं।

सुदामा जी जब मथुरा में भगवान कृष्ण के महल पहुंचते हैं, तो द्वारपाल उन्हें दरवाजे पर ही रोक लेते हैं। इसके बाद जब भगवान श्रीकृष्ण सुदामा से मिलते हैं तो वे उन्हें गले लगाते ही रोने लगते हैं। फिर उन्हें अपने महल में लेजाकर उनकी खूब सेवा करते हैं। इस कथा के दौरान हुई भजनों की मनोहारी प्रस्तुतियों से पंडाल में मौजूद सभी श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे। लोगों ने तालियां बजाते हुए जमकर नृत्य किया।

कलयुगका वर्णन किया

इसकेबांद पं. पंकज कृष्ण शास्त्री ने कलयुग के उपदेश, कलयुग का वर्णन किया। साथ ही नाम कीर्तन की महिमा की कथा सुनाई। कथा के समापन पर कार्यक्रम के कारण भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

छतरपुर नरसिंह मंदिर में पं. पंकज कृष्ण शास्त्री के प्रवचनों का आन्न्द लेते श्रोता