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बिना पर्यावरणीय स्वीकृति के नहीं लेंगे खदानें

7 वर्ष पहले
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छतरपुर खनिज विभाग में पत्थर खदानों की नीलामी प्रक्रिया ठेकेदारों द्वारा आवेदन दिए जाने के बादा रोक दी गई इसके बाद ठेकेदार आगामी तारीख को उपस्थित होंगे

भास्कर संवाददाता | छतरपुर

जिलेमें संचालित की पत्थर खदानों की नीलामी का काम अधर में लटक गया है। बुधवार को इनकी नीलामी का काम शुरू हुआ और कुछ ही मिनट बाद ठेकेदारों ने प्रक्रिया का बहिष्कार करते हुए इसे स्थगित करा दिया। अब जनवरी माह में रेत खदानों के साथ पत्थर खदानों की नीलामी की तैयारी शुरू हो गई है।

दरअसल कलेक्ट्रोरेट में स्थिति खनिज भवन में बुधवार को पत्थर की नीलामी की कार्रवाई शुरू की जानी थी। जिला खनिज अधिकारी प्रदीप तिवारी ने 60 खदानों की नीलामी की कार्रवाई शुरू कराई। इस कार्रवाई के दौरान दो ठेकेदारों ने अमानत राशि जमा की। इसी बीच ठेकेदारों के बीच इन खदानों की नीलामी की शर्तों को लेकर चर्चा तेज हो गई।

ठेका लेने के बाद की प्रक्रिया की जानकारी लगते ही ठेकेदार भड़क गए। क्रेसर एसोसिएशन के बैनर तले एकत्र हुए ठेकेदारों ने खनिज अधिकारी श्री तिवारी को ज्ञापन सौंपकर प्रक्रिया का विरोध किया। ठेकेदारों ने बिना पर्यावरणीय स्वीकृति के इन खदानों को नीलाम करने काे गलत बताया। इसी बीच पहले अमानत राशि जमा करने वाले ठेकेदारों ने भी अपने रुपए वापस मांगने शुरू कर दिए। ऐसे में कोई भी ठेकेदार नीलामी में हिस्सा लेने के लिए तैयार नहीं था। इसलिए नीलामी को आगामी आदेश तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

रेतखदानों की तरह हमें पैसा नहीं फंसाना

यहांपर नीलामी में हिस्सा लेने के लिए आए अधिकतर ठेकेदार खदानों के पर्यावरणीय स्वीकृति के मामले में उलझ जाने की बात से डरे हुए थे। ठेकेदार रामकिशोर सिंह के अनुसार बिना पर्यावरणीय स्वीकृति के दो साल पहले रेत खदानों की नीलामी हुई थी और अब तक रकम फंसी हुई है। ऐसे में उनकी पूंजी भी फंसने की आशंका है।

अबजनवरी में होगी नीलामी - इसमामले में जिला खनिज अधिकारी पीपी राय ने बताया कि पत्थर खदानों की पर्यावरणीय स्वीकृति लेना ठेकेदार की जिम्मेदारी है, लेकिन ठेकेदार विभाग से पर्यावरणीय स्वीकृति दिलाने की उम्मीद कर रहे थे,जो तकनीकी रूप से सही नहीं हैं। इसलिए नीलामी की प्रक्रिया को स्थगित करना पड़ गया। अब जनवरी माह में यह कार्रवाई होगी।

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