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महाआरती में उमड़े श्रद्धालु

7 वर्ष पहले
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श्रीराम ने सीता को वरमाला

गल्लामंडीमें आयोजित हो रही अन्नपूर्णा रामलीला में आकर्षक तरीके से लीला का मंचन किया जा रहा है। यहां धनुष यज्ञ की लीला का कलाकारों ने मंचन किया। इसे देखने के लिए दर्शकों की भारी भीड़ रही। धनुष यज्ञ की लीला के मंचन में आधुनिक प्रयोग किए गए। इसके अलावा यहां रावण बाणासुर संवाद और लक्ष्मण परशुराम संवाद की लीला का मंचन श्रृंगार रस और वीर रस से ओतप्रोत रहा।

सर्वप्रथम लीला के मंचन में राजा जनक के महलों में सीता के स्वयंवर का आयोजन किया गया जिसमें अनेक देश के राजाओं को धनुष तोड़ने के लिए आमंत्रित किया गया था, क्योंकि राजा जनक की प्रतिज्ञा थी कि जो शिव धनुष का भंजन करेगा वहीं उनकी पुत्री सीता को वरमाला पहनाएगा। रंगशाला में जब कोई भी राजा शिव धनुष का खंडन नहीं कर पाता है तब राजा जनक विलाप करते हुए कहते हैं कि अब लगता है पृथ्वी वीरों से खाली हो गई है, यह बात सुनकर लक्ष्मण की भृकुटी तन जाती हैं और वे कहते हैं कि इस धनुए की क्या मिशाल वह पूरी पृथ्वी को गेंद के समान एक ही झटके में उठा सकते हैं, और यह पृथ्वी वीरों से खाली हो गई तो वे अपने हाथों में धनुष-बाण लेना छोड़ देंगे। इस वीर रस की प्रस्तुति से उपस्थित जनता तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साहवर्धन करती रही। रंगशाला में उपस्थित प्रभु श्रीराम गुरू विश्वामित्र का आर्शीवाद पाकर शिव धनुष का खंडन कर सीता को वरमाला पहनाते हैं। धनुष भंजन और सीता स्वयंवर की लीला का मंचन श्रृंगार रस से भरपूर जीवंत और आकर्षण का केंद्र रहा।

लक्ष्मण परशुराम संवाद को मिली सराहना

लीलामें लक्ष्मण परशुराम संवाद का भी आकर्षक मंचन किया गया। भगवान शिव के धनुष का खंडन होने के बाद हिमालय पर तपस्या कर रहे परशुराम अचानक व्याकुल हो उठते हैं। परशुराम राजा जनक के दरबार में शिव धनुष खंडित देखकर वे अपना आपा खो बैठते हैं और कहते हैं कि यह धनुष किसने तोड़ा है। इस पर प्रभु श्रीराम कहते हैं कि कोई उनका ही दास होगा जिसने इस धनुष का खंडन किया है। लेकिन परशुराम अपने क्रोध में राम को भला-बुरा कहने लगते हैं, उनके यह कथन सुनकर लक्ष्मण का अभिनय करने वाले आदर्श मिश्रा परशुराम को ललकारते हुए कहा कि बहुत हो गया। लक्ष्मण कहते हैं कि राजा जनक ने जब पूरी पृथ्वी को वीरों से विहीन बताया तभी उनके बड़े भाई श्रीराम ने इस धनुष का खंडन करते हुए वीरों की शान को बनाए र