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चिटफंडी बलराम को चार साल की जेल

7 वर्ष पहले
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चिटफंडकंपनी निक्की इंन्फ्राटेक लिमिटेड के नाम पर पैसा वसूलने वाले आरोपी बलराम मंडोलिया को कोर्ट ने चार साल के कारावास की सजा सुनाई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश कमल सिंह की कोेर्ट ने गुरुवार को चिटफंडी बलराम को आईपीसी की धारा 420 के तहत दोषी मानते हुए चार साल का कारावास एक हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया। वहीं मध्यप्रदेश निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम 2000 के तहत एक साल का कारावास 50 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। ये दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

डबरा निवासी आरोपी बलराम मंडोलिया ने निक्की इंफ्राटेक कंपनी के नाम से लाखों रुपए की राशि निवेशकों से एकत्र की। इसमें निवेशकों को ज्यादा ब्याज देने धन दोगुना करने का लालच दिया गया। लेकिन निवेशकों की राशि का भुगतान किए बिना ही 2011 में कंपनी बंद कर दी गई। चिटफंडी ने कुछ निवेशकों को जो चेक दिए, वे बाउंस हो गए। इसकी शिकायत निवेशक राजा बेटी, महेश जाटव, भगवान सिंह, नर्मदा देवी आदि ने डबरा थाने में की थी। कोर्ट में शासन की ओर से अधिवक्ता जगदीश शर्मा साक्ष्य को प्रमाणित करने में सफल रहे। उन्होंने तर्क रखा कि उक्त कंपनी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नियमों के विपरीत पैसा एकत्र कर रही थी। वहीं निवेशकों को पैसा वापसी की कोई गारंटी भी नहीं दी गई। अदालत ने आरोपी बलराम मंडोलिया को दोषी मानते हुए चार साल का कारावास और 51 हजार रुपए का जुर्माना भरने की सजा सुनाई। संभवत: चिटफंड के मामले में सजा का यह प्रदेश में पहला मामला है।