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तपस्वी के 33 उपवास पूरे, निकाली रथयात्रा
नगरकी पल्लवी पिता प्रदीप पोरवाल के 33 उपवास की तपस्या पूरी होने पर गुरुवार को समाजजन ने भगवान की रथयात्रा निकली। तपस्वी का अनुमोदना समारोह हुआ। विभिन्न सामाजिक, धार्मिक संगठनों ने तपस्वी का बहुमान किया। साध्वी दर्शितकलाश्रीजी ने तप का महत्व बताया।
सुबह 8.30 बजे भगवान की रथयात्रा शीतलनाथ जैन मंदिर से शुरू हुई। तपस्वी पल्लवी आकर्षक बग्घी में विराजीं। वरघोड़े को साध्वी डॉ. दर्शितकलाश्रीजी ने निश्रा प्रदान की। रथयात्रा महावीर मार्ग, चोपाटी चौराहा, प्रगति चौराहा होकर पाटीदार धर्मशाला पहुंची। यहां शीतलनाथ राजेंद्र श्वेतांबर मूर्तिपूजक ट्रस्ट, राजेंद्र नवयुवक परिषद, चातुर्मास समिति, नवर| परिवार और नवर| महिला मंडल ने तपस्वी का बहुमान किया। संचालन विजय तांतेड़ ने किया। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र सुराना, शीतलनाथ चेरिटेबल ट्रस्ट अध्यक्ष डॉ. सोहनलाल सुराना, सचिव अनिल सुराना, प्रदीप पोरवाल ने भी संबोधित किया। अनुमोदना गीत रितु पोरवाल, श्वेता हर्षिता जैन ने प्रस्तुत किया।
संकल्पकी परीक्षा बार-बार होती है- तपस्वीपल्लवी की अनुमोदना समारोह में डॉ. दर्शितकलाश्रीजी ने कहा तपस्या से कर्मों की निर्जरा होती है। जिन्होंने दृढ़ निश्चय कर लिया वे ही तपस्या कर पाते हैं। क्योंकि तपस्या करने वाले के संकल्प की परीक्षा बार-बार होती है। जो बाधा को पार कर लेते हैं, वे यशस्वी होते हैं।
नृत्य करतीं महिलाएं। इनसेट: बग्घी में विराजीं तपस्वी पल्लवी। फोटो भास्कर