सहकारी बैंक अध्यक्ष का चुनाव आज
निर्वाचन नियमों की अवहेलना कर कई समितियों से डायरेक्टर बनकर पहुंचे कोऑपरेटिव बैंक
नरेशसिंह ठाकुर| दमोह
जिलासहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष का चुनाव मंगलवार को होना है, लेकिन चुनाव के ठीक पहले डाॅयरेक्टर बनकर बैंक के निर्वाचन में हिस्सेदारी कर रहे डायरेक्टरों के चुनाव पर सवाल उठाए जा रहे हैं। यूथ कांग्रेस विधानसभा जबेरा के अध्यक्ष दीपक कटारे ने बैंक अध्यक्ष के चुनाव के एक दिन पहले इस मामले को उठाकर सहकारिता चुनाव की पूरी प्रक्रिया पर कटघरे में खड़ा कर दिया हैं। कांग्रेस ने सहकारिता विभाग के अधिकारियों को शिकायत भेजकर सदस्यों के चुनाव पर आपत्ति जताई है।
सहकारिता विभाग में बडे़ पदों पर पहुंचने के लिए निर्वाचन के नियमों को ताक पर रखकर सहकारिता के महारथी बडे़ पदों पर पहुंचना चाह रहे हैं। जिले में संचालित समितियों के वाॅयलाज (संविधान) में उल्लेख शर्ताें एवं नियमों को अनदेखा कर समितियों के सदस्य बना दिए गए हैं। जिला सहकारी बैंक के चुनाव हो रहे हैं। बैंक के अध्यक्ष पद पर स्थापित हाेने के लिए संचालक मंडल का चुनाव हो चुका है, जिसमें विभिन्न वर्गों से दस संचालक निर्विरोध चुने गए हैं। कोऑपरेटिव बैंक के संविधान के अनुसार क, ख, वर्गाें की समितियों से संचालक मंडल के लिए दमोह से सुखनंदन पटेल, पटेरा से विवेक शेंडेय, हटा से राजेश पौराणी, बटियागढ़ से मुरारी लाल पटेल, पथरिया से राजेंद्र गुरू, जबेरा से अंजनी सिंह, तेंदूखेड़ा से विवेक जैन, मार्केटिंग तेंदूखेड़ा से बहादुर सिंह, उद्योग समिति से अनिल मिश्रा निर्वाचित घोषित हुए हैं। बैंक के संचालक मंडल एवं अध्यक्ष, उपाध्यक्ष पद के लिए आरक्षण के कारण सहकारिता के राजनेता निर्वाचन नियमों को तोड़कर एक समिति के अलावा कई समितियों से सदस्य बनने के बाद संचालक मंडल में पहुंच गए हैं। अब ऐसे लोग अध्यक्ष पद एवं भोपाल दिल्ली जैसी बड़ी संस्थाओं में डायरेक्टर बनकर बैठना चाहते हैं। डायरेक्टर पदों के चुनाव में केवल सत्ताधारी पार्टी के संचालक काबिज हुए हैं। कांग्रेस पार्टी सहकारिता के चुनाव में वर्चस्वहीन साबित हुई है।
यह है नियम
सहकारितानियम एवं जिले में संचालित समस्त सहकारी समितियों के संविधान के अनुसार संबंधित समिति का सदस्य उस व्यक्ति को बनाया जा सकता है जो संबंधित समिति के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत वहां का मूल निवासी हो और उस संस्थान की विधि को पढ़क