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सज गया मां का दरबार, मंिदरों में उमड़ी भीड़
शारदेयनवरात्र के पहले दिन से ही शहर का माहौल धर्ममय हो गया। पूरे विधि विधान के साथ पंडालों में मां जगतजननी की स्थापना हुई। वहीं अल सुबह से मातारानी के मंदिरों में जल चढ़ाने वालों की कतारें लगना शुरू हो गई। शाम के समय मातारानी की आरती में श्रद्धालु पहुंचे। नौ दिनों तक शहर में मां के जयकारे गुंजायमान होंगे। नवरात्र पर्व पर सारा शहर रोशनी से जगमगा रहा है। शहर के प्रसिद्ध क्षेत्र बड़ी देवी माता मंदिर में अल सुबह से जल अर्पित करने वालों की कतारें लगना शुरू हो गई थीं। वहीं फुटेरा फाटक स्थित भारत दुर्गा देवालय के पट भी खुल गए हैं। यहां हर छह माह मातारानी भक्तों को दर्शन देती हैं। बाकी दिन मंदिर के कपाट बंद रहते हैं। मानसपाठ स्थित कंकाली माता मंदिर में भी दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। शहर के सभी देवी मंदिरों में सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं का आना जाना लगा रहा।
स्थानीय महाकाली चौराहा पर हर साल की तहर इस साल भी मां काली की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है। विधि विधान के साथ पं. संतोष तिवारी ने मां की स्थापना कराई। मातारानी को गाजे बाजे के साथ लाया गया। स्थानीय बजरिया वार्ड नं. 5 मानस पाठ में सार्वजनिक दुर्गोत्सव समिति द्वारा प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी मां जगत जननी की प्रतिमा की स्थापना की गई। डीजे एवं बैंडबाजों की धुनों पर थिरकते हुए समिति सदस्य एवं युवा मां दुर्गा की प्रतिमा को धूमधाम से लेकर मानस पाठ पहुंचे। जहां पर पूर्ण विधि-विधान से स्थापना की गई। सर्वप्रथम मां दुर्गा का पूजन-अर्चन पं. भोला महाराज के मार्गदर्शन में किया गया इसके बाद प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर शिवदास चौरसिया, बिहारी चौरसिया, रामरतन चौरसिया, कन्छेदी, लखन, शंभू, संदीप, भरत, मुन्ना, ब्रजेश, दीपक, जेके, रिंकू, अवस्थी, गुड्डू, आशीष, राजुल, सोनू, शिवम, मौज्ूद रहे।
168बर्ष प्राचीन मां का अद्भुत दरबार
फुटेराफाटक के पास स्थित भारत दुर्गा देवालय का इतिहास वर्षों पुराना है। मंदिर के पुराजी नरेंद्र भारत के अनुसार 1851 में मां शक्ति के स्वरूप की स्थापना हुई थी। मंदिर का इतिहास 168 वर्ष पुराना हैं। उन्होंने बताया कि प्राचीन भारत दुर्गा मंदिर के पट भक्तों के नवरात्र पर खोल दिए जाते हैं। यहाँ बिराजमान मां सिह्बाहानी का दरबार हर छह माह में सिर्फ 1 बार नवरात्र पर लगता है बाकि साल भर गर्भ गृह बंद रहता है और ब