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जल अर्पण कर पितरों का तर्पण कर दी विदाई, आज महाआरती

7 वर्ष पहले
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पितृपक्षमें जहां लोगों द्वारा अपने पूर्वजों को ब्रह्ममुहूर्त में जलाशयों, नदियों के घाटों पर पहुंचकर तर्पण किया, वहीं पितृमोक्ष अमावस्या पर पितरों को तर्पण कर उन्हें विदाई दी गई। दो दिन अमावस्या होने के कारण मंगलवार को सुबह से तालाब के घाटों, नदियों पर तर्पण करने वाले मौजूद रहे। बुधवार को भी तर्पण कार्य के साथ पूर्वजों को विदा किया जाएगा साथ ही पितरों की महाआरती का आयोजन होगा। पितृपक्ष पर शहर के फुटेरा तालाब, बेलाताल तालाब, पुरैना तालाब सहित जिले की व्यारमा नदी पर ब्रह्ममुहूर्त में पितरों को तर्पण का सिलसिला शुरू हो जाता था।

जिला मुख्यालय से लगभग 30 किमी की दूरी पर स्थित ग्राम बलारपुर के समीप से निकली व्यारमा नदी में जिले के कुछ ब्राह्मणों ने महेश पांडे के नेतृत्व में एकत्रित होकर तर्पण कार्य किया। पितृमोक्ष अमावस्या के पवित्र अवसर पर विश्व की उन समस्त दिवंगत आत्माओं का तर्पण भी किया जो या तो असमय काल के गाल में समा गए या फिर जिनका तर्पण करने वाला कोई उनका वंशज नहीं है। अपने पूर्वजों के साथ इनको भी भगवान विष्णु से अपने चरणों में स्थान देने की कामना भी की। लगभग दो घंटे से अधिक समय तक शास्त्रों में वर्णित लगभग सभी प्रकार से पूजन हवन भी किया गया। इस अवसर पर लक्ष्मीनारायण वैष्णव, पंकज दुबे, गजेंद्र तिवारी, एचएन श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रही।

आजहोगी महाआरती

पुरानातालाब पंचमुखी हनुमान मंदिर के पुजारी पं. राहुल शास्त्री ने बताया कि बुधवार को पितरों की महाआरती की जाती है। कपूर द्वारा आरती एवं पितृ स्त्रोत के पाठ का आयोजन होता है। इसके लिए कपूर, चंदन, रोरु, फूल, फल, मीठा, नारियल, दही, भात एवं मिट्टी का दिया आवश्यक होता है। उन्होंने बताया कि सुबह नौ बजे से महाआरती होगी।

दमोह। पितृमोक्ष अमावस्या पर लोगों ने अपने पूर्वजों को ब्रह्ममुहूर्त में जलाशयों, नदियों के घाटों पर पहुंचकर तर्पण किया।