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धरा के सबसे बडे़ आश्चर्य दिगंबर संत हैं : जनसंत
सागरनाका स्थित सदगुवां जैन मंदिर में विराजमान जनसंत विरंजन सागर जी महाराज ने मंगलवार को प्रवचन दिए। उन्होंने अपने प्रवचनों में कहा कि दुनिया में सात आश्चर्यों को मान्यता है। विश्व में बेजान चीजों को बडा़ आश्चर्य माना गया है। भारत के ताजमहल को भी इन सात आश्चर्यों में गिना जाता है। लेकिन इन आश्चर्यों के अलावा भी अनेक आश्चर्य ऐसे हैं जो भारत की पावन वसुंधरा ने दिए हैं जो जीवंत हैं। जो लोगों के हित के लिए हमेशा ही काम करते हैं। साथ ही उन्हें सदमार्ग पर चलाने कडवे मीठे वचनों से उनके हृदय को परिवर्तित करते रहते हैं। वे हैं दिगंबर संत। जो केवल भारत भूमि पर ही पैदा होते हैं। जो अपने जीवन को समाज के कल्याण के लिए समर्पित कर देते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान समय में जब पश्चिमी सभ्यता एवं फैशन का बोलबाला है। ऐसे समय में कोई व्यक्ति युवा अवस्था में मुनि दीक्षा लेकर नग्न रहकर निर्विकार रहता है। यह दुनिया का आश्चर्य ही है। इससे बडा़ कोई आश्चर्य नहीं हो सकता। यदि लोग दुनिया में सात आश्चर्यो को मानते हैं। तो यह आठवां आश्चर्य कहा जा सकता है। दिगंबर जैन संतों का वात्सल्य सभी को दीवाना बना देता है।
वह अपने आप को भाग्यशाली ही नहीं सौभाग्यशाली मानता है कि उसे दिगंबर संतों की चरण धूल एवं आशीर्वाद मिल रहा है। ऐसे संतों की चर्या ही अपने आप मे आश्चर्य कही जा सकती है।
इस दौरान क्षुल्लक विशौम्य सागर जी महाराज ने भी भक्तों को प्रवचनों के माध्यम से संत चर्या के बारे में विस्तार से समझाया। प्रवचनों के दौरान बडी़ संख्या में भक्तों की मौजूदगी रही।
जनसंत विरंजन सागर