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जीवन निर्माण का केंद्र है पाठशाला : माता जी

7 वर्ष पहले
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स्थानीयनेमीनगर कालोनी स्थित श्री वर्णी जैन प्रशांतमती पाठशाला का वार्षिक पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र वितरण समारोह संत शिरोमणि आचार्य र| श्री 108 विद्यासागर मुनि महराज की शिष्या श्री 105 आर्यिका र| धारणामति माता जी के सानिध्य में हुआ। समारोह का शुभारंभ साक्षी के द्वारा सरस्वती वंदना से हुआ। ज्ञानदीप दीपन मंत्रोच्चार पूर्वक डॉ. सत्येंद्र जैन के साथ उनकी बाल ब्र. बहन माता श्री और पाठशाला की शिक्षिकाओं ने किया। प्रास्ताविक वक्तव्य और सफल संचालन दमोह जैन पंचायत के संरक्षक पाठशाला के प्रो. भागेंदु जैन ने किया।

पूज्य माता धारणामति के सानिध्य में विभिन्न परीक्षाओं में सफल 6 वर्ष के बच्चों से लेकर 75 वर्ष के वृद्धों के लिए प्रमाण पत्र एवं पुरस्कार प्रदान किए गए। इस स्वर्ण अवसर पर अपना मंगल आशीष प्रदान करते हुए पूज्य आर्यिका माता जी ने सोलह वर्षों से सतत संचालित इस पाठशाला के समुन्नयन के लिए कामना की। उन्होंने कहां कि भौतिक शिक्षा के केंद्र तो पग पग पर मिलते हैं लेकिन जीवन में विवेक का पल्लवन और नैतिक आचरण का बोध कराकर सुसंस्कारित नागरिक तैयार करने वाले केंद्र बहुत बिरले होते हैं।

यह पाठशाला भी एक ऐसा ही केंद्र है सभी को यहां बच्चो स्वयं को भी संस्कारवान बनाना चाहिए। उन्होनंे स्वयं के जीवन के भी अनेक प्रेरणास्पद प्रसंग सुनाए। सिविल वार्ड में विराजमान इन माता की को विशाल जुलूस पूर्वक ध्वजा पताकाओं और मंगलवाद्यो के साथ ने नेमीनगर लाया गया जिसकी जगह-जगह पर आरती कर अगवानी की गई।

दमोह| नेमीनगरकाॅलोनी स्थित वर्णी जैन प्रशांतमती पाठशाला में पुरस्कार एवं ्रमाण पत्र वितरण समारोह आयोजित किया गया।