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जब ग्रामसभा ही नहीं तो कैसे बनेंगे प्रस्ताव

7 वर्ष पहले
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जंगल जमीन से बेदखल आदिवासी पहुंचे कलेक्टोरेट

तेंदूखेड़ातहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत इमलीडोल के ग्राम जरुआ के गरीब आदिवासियों को अवैध रूप से वनभूमि से बेदखल कर दिया गया है। मंगलवार को आदिवासी क्षेत्री विधायक प्रताप सिंह लोधी के नेतृत्व में कलेक्टोरेट पहुंचे और कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह को अपनी समस्या सुनाते हुए संयुक्त आवेदन दिया। विधायक श्री ने बताया कि ग्राम के मिठाईलाल, बलीराम, हरप्रसाद, जग्गू, प्रेमलाल, गनेश, राजेश, प्रहलाद, नन्नेभाई, गुलाब, कमलेश, गुड्डा, मन्नू, मोहन, हरि, गिरन, प्रकाश, सुरेश, कैलाश आदि गरीब आदिवासी लगभग 50 वर्षोँ से इमलीडोल वीट के पी एफ 175 में वनभूमि पर अतिक्रमण कर अपने परिवार की जीविका चला रहे थे। वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत वन भूमि अधिकारों के लिए दावा भी प्रस्तुत किए थे। जिसका स्थल टीप, पंचनामा संयुक्त टीम पंचायत सचिव, हल्का पटवारी एवं वीटगार्ड के द्वारा तैयार किया गया था। उन्होंने बताया कि पांच लोगों के दावे जिला स्तरीय समिति द्वारा मान्य कर लिए गए थे शेष निरीक्षण टीप में गलत जानकारी भरकर निरस्त कर दिए गए, जबकि सभी अतिक्रमणकारियों द्वारा वनभूमि पर लगभग एक साथ कब्जा किया गया था।

विधायक ने बताया कि वर्ष 2013-14 में सागौन प्लांटेशन की कार्ययोजना बनाई गई जिसमें सफाई एवं खकरी लगाने का कार्य भी इन लोगों से कराया गया जिसकी मजदूरी का भुगतान भी नहीं किया गया। इसके बाद बिना किसी नोटिस अथवा पीओआर जारी किए वनभूमि से बेदखल कर दिया गया। जिससे गरीब परिवार भूखों मरने की कगार पर हैं। मामले की जांच कराकर गरीबों को न्याय दिलाने की मांग की गई है।

दमोह। जनसुनवाई में जबेरा क्षेत्र के विधायक के साथ वन भूमि पर काबिज लोग समस्या लेकर कलेक्टोरेट पहुंचे।