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संस्कारों की प्रयोगशाला घर-परिवार है : प्रदीप

7 वर्ष पहले
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परिवारएक पाठशाला होती है, यही से बच्चों को संस्कारवान बनाया जाता है। शिशु के गर्भ में आते ही उसे सोलह संस्कार दिए जाते हैं, जन्म के बाद मुंडन, विद्यारंभ, यज्ञोपवीत आदि संस्कार दिए जाते हैं। संस्कारों की सबसे बड़ी प्रयोगशाला घर परिवार है यह बात शांतिकुंज हरिद्वार से आए टोली नायक प्रदीप अवस्थी ने गायत्री मंदिर परिसर में चल रहे सप्तक्रांति युग परिवर्तन महायज्ञ में प्रवचन के दौरान कही।

गायत्री शक्तिपीठ में चल रहे चार दिवसीय सप्तक्रांति युग परिवर्तन महायज्ञ के अन्तर्गत सप्तकुंडीय गायत्री महायज्ञ में दूसरे दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के द्वारा आहूतियां दी गई। सातों कुंड के सामने युगऋषि द्वारा बताए गए साधना, पर्यावरण, शिक्षा, स्वावलंबन, कुरीति उन्मूलन, नारी जागरण का संदेश देते हुए तख्तियां लगाई गई थी।

आचार्यविराग सागर जी का मुनि दीक्षा दिवस मनाया

दमोह|सागर नाका स्थित सदगुंवा जैन मंदिर में रविवार को जैन आचार्य विराग सागर जी महाराज का 32 वां मुनि दीक्षा दिवस मनाया गया। इस दौरान जहां सुबह से श्री जी का अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन किया गया। वहीं दोपहर में जनसंत विरंजन सागर जी महाराज एवं क्षुल्लक विशौम्य सागर जी महाराज के सानिध्य में विविध धार्मिक आयोजन हुए। सबसे पहले आचार्य विराग सागर जी महाराज का अष्टद्रव्य से पूजन हुआ।

जिसमें हरियाणा, दिल्ली, सागर, जबलपुर सहित दमोह जिले के ग्रामों से आए भक्तों ने अष्ट द्रव्य से संगीतमय पूजन किया। आयोजन में जनसंत विरंजन सागर महाराज ने प्रवचनों के माध्यम से आचार्य विराग सागर जी महाराज के जीवन एवं तपस्चरण के बारे में विस्तार से बताया। साथ ही संत जीवन के महत्व पर अपनी बात कही। उन्हींने कहा कि आचार्य विराग सागर जी महाराज ने जैन धर्म की पताका पूरे देश में फहराई है। साथ ही अनेक दीक्षाएं देकर वे लोगों को संयम के मार्ग पर चलने के लिए माध्यम बन रहे हैं। आज उनका 32 वां मुनि दीक्षा मनाकर हम सभी गौरव महसूस कर रहे हैं। ऐसे आचार्य परमेष्ठी का मुनि दिवस मनाकर सभी ने पुण्य का आश्रव किया है। वहीं शाम को महाआरती एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी भक्तों की मौजूदगी रही।

मंगलअगवानी आज

आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज के परम शिष्य क्षुल्लक श्री विरंजन सागर महाराज एवं क्षुल्लक श्री विसोम्य सागर जी महाराज की सुबह 7.30 बजे सागर नाका से मंगल अगवानी