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गूंगी बहरी होने के बाद भी विमला को शिक्षा के प्रति गहरा लगाव

7 वर्ष पहले
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बटियागढ़जनपद के ग्राम मढ़ाटोला में 5 साल की विमला वारेला आदिवासी बच्ची गूंगी एवं बहरी होने के बावजूद भी उसका शिक्षा के प्रति लगाव है। इशारों से वह सब कुछ समझती है। यहां तक स्कूल के एडमिशन होने के बावजूद वह रोजाना स्कूल पहुंचकर शिक्षकों के इशारे समझकर बच्चों की पढ़ाई देखकर स्वयं पढ़ने का प्रयास करती है। ग्रामीणों ने बताया कि विमला में शिक्षा के प्रति बेहद लगाव एवं रूझान है, लेकिन उचित पहल होने से अभी तक उसका स्कूल में दाखिला भी नहीं किया गया है।

शिक्षक श्याम सुंदर तिवारी ने बताया कि विमला की पढ़ाई के प्रति रुचि देखते हुए वह उसे कक्षा में बैठाकर ब्लैक बोर्ड के जरिए पढ़ाने का प्रयास करते हैं। जहां वह अक्षर सीखने का प्रयास करती है। उसे जिला स्तर पर मूक बधिर छात्रावास में दाखिले की जरूरत है लेकिन उसके माता-पिता गुजरात में रहकर मजदूरी करते हैं एवं परिवार का भरण पोषण करते हैं। विमला के ताऊ चैन सिंह ने बताया कि वह ग्राम पंचायत सिंगपुर के अंतर्गत मढाटोला ग्राम में एक टपरिया में रहते हैं। बच्चे के माता पिता गुजरात मे मजदूरी करते हैं। वहां से वह खर्च भेजते हैं। जिससे वह बच्ची का भरण पोषण करते हैं। उन्होंने बताया कि वह स्वयं अपाहिज हैं, जिस कारण वह शारीरिक श्रम नहीं कर पाते। अगर प्रशासन इस दिशा मे पहल करे तो बच्ची का भविष्य संवर सकता है एवं भविष्य में वह आत्मनिर्भर रहकर खुद का भरण पोषण कर सकती है।

फतेहपुर। गूंगीबहरी होने के बाद भी विमला को पढ़ाई से लगाव है।