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शोपीस बनकर रह गए स्मार्ट क्लास रूम

7 वर्ष पहले
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सरकारीस्कूलों में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक शिक्षा देने के लिए शासन द्वारा शैक्षणिक सत्र की शुरूआत में जिले के 30 चुनिंदा स्कूलों में स्मार्ट क्लास रूम बनाए गए थे। जिसके माध्यम से बच्चों को ब्लैकबोर्ड की जगह प्रोजेक्टर एलसीडी के माध्यम से विषय विशषज्ञों द्वारा शिक्षा दी जाना थी। इसके लिए सभी चयनित स्कूलों में लाखों रुपए की लागत से उपकरण भेजे गए थे लेकिन पिछले चार माह इनकी फिटिंग का कार्य नहीं हो पाया है और ही इंस्टाल किया गया है। वहीं जिन शिक्षा विभाग द्वारा जिन स्कूलों का चयन किया गया है वहां पर बिजली कनेक्शन के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं है। शिक्षकों का कहना है कि बिजली कनेक्शन बिल भरने के लिए विभाग द्वारा अलग से कोई राशि भी स्वीकृत नहीं की गई है। जिससे बिजली कनेक्शन होने के कारण यह उपकरण स्कूल में रखे धूल खा रहे हैं। ऐसे में शासन की यह योजना शुरूआती दौर में ही फ्लॉप साबित हो रही है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही भोपाल से तकनीकी विशेषज्ञ आने वाले हैं जो उपकरणों को फिट कर इंस्टालेशन करेंगे।

जानकारी के अनुसार राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों की शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाने के लिए स्मार्ट क्लासेस की शुरूआत जुलाई माह से की जानी थी। जिसके तहत स्मार्ट स्वान नेटवर्क द्वारा वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभिन्न विषयों जिसमें गणित, अंग्रेजी विज्ञान की शिक्षा उत्कृष्ट विषय विशेषज्ञों द्वारा दी जाना है। इसके लिए शिक्षा विभाग द्वारा चयनित स्कूलों के एक कक्ष को स्मार्ट क्लास रूम में डेवलप किया गया है। जहां पर एक साथ 40 बच्चों को बैठाकर टेलीविजन पर दिखाए जा रहे पाठ को देख सकेंगे। इसका उद्देश्य बच्चों को चल आकृति, चित्रों, मनोरंजन ज्ञानवर्धक कार्यक्रमों से सरल से सरल तरीकों के माध्यम से शिक्षा दी जाना है। इसके अलावा भोपाल में बैठे अधिकारी सीधे बच्चों से सवाल-जबाव कर सकेंगे। स्मार्ट क्लास रूम का संचालन के लिए प्रत्येक स्कूल के एक शिक्षक को प्रशिक्षित भी किया जा चुका है। स्मार्ट क्लास के लिए जिले के जिन स्कूलों का चयन किया गया है उनमें दमोह ब्लॉक के सरदार पटैल मिडिल स्कूल दमोह, बालक अभाना, कन्या स्कूल अभाना, मिडिल स्कूल मारूताल, कन्या स्कूल हिंडोरिया, मिडिल स्कूल हिन्नाई ऊमरी, मिडिल स्कूल गुंजी, मिडिल स्कूल समन्ना मडिया स्कूल शामिल