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जीवन में कभी ब्राह्मण संत का धन हरण नहीं करना चाहिए : पं. शास्त्री
स्थानीयबेलाताल टापू मंदिर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के दौरान सोमवार को पं. रवि शास्त्री महाराज ने कहा जीवन में कभी ब्राह्मण संत का धन हरण नहीं करना चाहिए। चाहे वह अनजाने में भी क्यों हो। राजा नृग ने गलती से वह गाय दूसरे ब्राह्मण को दी जो पहले दान कर चुका था। अपितु वह बहुत बडा़दानी था फिर भी मरने के बाद गिरगिट बना। उसकी मात्र एक ही गलती थी जो अनजाने में हो गई थी।
भागवत में द्रोपती स्वयं कहती हैं कि विष पीने वाला तो स्वयं मरता है पर जो ब्राहम्ण का धन हरण करता है तो अपने वंश को भी गर्त में गिरा देता है। इसलिए जीवन में ध्यान से कभी ब्राह्मण या संत का धन लेने की चेष्ठा नहीं करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जीवन में आनंद से रहना चाहिए। जैसे 56 करोड़ भगवान का परिवार है लेकिन वे हमेशा जीवन में आनंद से रहते थे कभी भी सिर पकड़कर नहीं बैठे। भगवान के दोनों अवतारों में प्राणी मात्र को मानव जीवन सिखाया गया। भागवत में जो लिखा है उसे जीवन में उतारो और रामायण में जो लिखा है उसे जीवन में करो। तभी मानव जीवन सफल है। कथा संयोजक पं. छोटू शास्त्री, लकी शास्त्री, सुरेश शास्त्री, पं आशुतोष गौतम ने अधिक से अधिक संख्या में श्रद्धालुओं से कथा में पहुंचने का आव्हान किया है।