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कन्हैया के कहने पर ग्वाल बाल सरोवर में कूद गए...
स्थानीयबेलाताल टापू मंदिर में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा चल रही है। रविवार की कथा पं. रवि शास्त्री महाराज ने बताया कि कन्हैया के कहने पर सभी ग्वाल बाल सरोवर में कूंदे और कूंदने पर सीधे बैकुंठ में पहुंचे वो भी सा शरीर और जब वापस आए तो कन्हैया ने पूछा कैसा लगा बैकुंठ तो ग्वाल बाल बोले मैया नेकऊ अच्छो नाय लगयो। तुम्हारो बैकुंठ क्यों कहा ग्वाल वालों ने मानो ग्वाल बाल कहना चाहते हैं कि जब तक मनुष्यों ने आपकी लीला और चरित्रो का रस नहीं लिया तभी तक वह तमाम जगह भटकता है। सुख प्राप्त करने के लिए सारा विश्व घूमने के बाद भी उस जीव को सुख शांति नहीं मिल पाता। पर जब वह भागवत रुपी सरिता में लहरें रुपी लीलाओं का अनुमोदन करता है और उस सरिता में डुबकी लगाता है तो डुबकी लगाते ही सारी विकार वासनाएं प्रलोभन छूट जाते हैं स्वर्ग आदि बैकुंठ स्वर्ग आदि बैकुंठ भूल जाता है और कृष्णमय हो जाता है।
जैसे हनुमान जी की तरह राम जी जब अवधवासियों के साथ साकेत धाम जा रहे थे तो हनुमान जी से कहा चलो तो हनुमान जी हाथ जोड़कर बोले कि आप तो सदा हमारे हृदय में निवास करते हैं पर वो कथा श्रवण करने के लिए बैकुंठ में नहीं मिलेगी। जो इस धराधाम पर मिल रही है और हनुमान जी नहीं गए साकेत धाम भी छोड़ दिया। उसी प्रकार माधुर्य रख पाने के लिए ग्वाल वालो ने भी बैकुंठ छोड़ दिया पर वृंदावन धाम नहीं छोडा़। कथा संयोजक पं. छोटू शास्त्री, लकी शास्त्री, सुरेश शास्त्री, पं आशुतोष गौतम ने अधिक से अधिक संख्या में श्रद्धालुओं से कथा सुनने की अपील की है।
कथाचार्य पं. रवि शास्त्री।
दमोह। बेलाताल टापू मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दौरान भगवान की जीवंत झांकी सजाई गई।
दमोह। बेलाताल टापू मंदिर में कथा सुनते श्रद्धालु।