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भगवान ने छोटी उम्र में ही राक्षसों का वध किया : पं. नीरज शास्त्री

6 वर्ष पहले
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शिव पूजा से चारों पुरुषार्थ की प्राप्ति होती है: आशीष शास्त्री

बम्होरी में शिव महापुराण का आयोजन

निजसंवाददाता। बनवार

बम्हौरीमें शनिवार को शिव महापुराण की बैठकी हुई। इसके पहले शुक्रवार की शाम भव्य कलश यात्रा निकाली गई। जिसमें गांव के सैकड़ों लोग शामिल रहे। शिव महापुराण का महात्म्य बताते हुए कथा व्यास आशीष मिश्रा ने अपने प्रवचनों में कहा कि भगवान शिव प्राणी मात्र के समस्त कष्टों से क्षण भर में मुक्ति देने वाले हैं। शिव के कल्याणकारी भाव का प्रत्यक्ष प्रमाण यह है कि उन्होंने संसार की भलाई के लिए समुद्र मंथन से निकले हुए कालकूट विष का पान कर लिया और देवताओं सहित समस्त संसार की रक्षा की। और स्वयं ने संसार की त्यक्त वस्तुओं को ग्रहण किया। नाग को गले का हार बनाया। शिव आदि देव हैं। ब्रम्हा एवं विष्णु के बीच में रजोगुण और सत्वगुण में जब द्वंद हुआ तो तमोगुण प्रधान भगवान शिव ने अपनी सर्वस्व सत्ता स्थापित करके दोनों के बीच ज्योतिर्लिंग के रुप में प्रकट हुए। ब्रम्हा विष्णु उनके लिंग का छोर पा सके। भगवान शिव चारों पुरुषार्थ के देने वाले हैं। श्री शास्त्री ने कहा कि शिव महापुराण का जो भी श्रवण करता है उसे हजारों अश्वमेघ यज्ञ का फल मिलता है।

भगवान की जीवंत झांकी सजाई गई।

दमोह। बूंदाबहु मानसभवन में चल रही श्रीमद्भगवत कथा में शनिवार को गोवर्धन पूजन की कथा का महत्व बताया गया। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी रही।