नर्मदा के पवित्र जल से करेंगे जलाभिषेक
महाशिवरात्रि पर बांदकपुर पहुंचेंगे हजारों कांवरिये
निजसंवाददाता | बनवार
भलेही अभी महाशिवरात्रि पर्व के लिए पांच दिन शेष रह गए हैं, लेकिन अभी से जागेश्वर महादेव के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक कांवड़ यात्रा शुरू हो गई है। जिसमें श्रद्वा एवं विश्वास से परिपूर्ण संकल्प शक्ति तथा साहस से ओत-प्रोत कावंड यात्रा विभिन्न जिलों से शिव भक्त कांवडियों की संख्या भारी संख्या में बांदकपुर धाम के लिए प्रस्थान करती दिख रही है।
कांवड यात्रियों के जत्थे नर्मदा का पवित्र जल भरकर पैदल यात्रा करके बांदकपुरधाम में भगवान जागेश्वरनाथ महादेव का महाशिवरात्रि में जलाभिषेक करने के लिए जहां तहां से शुरू हो गई है। जिसमें एक जत्था क्षेत्र के ग्राम चिलौद टपारिया से होकर नर्मदा जी का पवित्र जल भरकर पैदल करके लौटा है। जत्थे में शामिल अबध बिहारी विश्वकर्मा, बलराम सोनी, कमल ठाकुर, रम्मू सोनी ने बताया कि कांवड़ यात्रा से नर्मदा का जलभर के पवित्र स्थान हनुमान जी धाम कंचनपुरी में रख दिया है। कंचनपुरी से महाशिवरात्रि के अवसर पर कांवड यात्रा पुनः शुरू होगी और मां नर्मदा के पवित्र जल से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया जाएगा।
गौरतलब है कि ये कावंड़ियां अपनी कांवर को सजाकर भोलेबाबा के मधुर गीत बम्बुलिया गाते हुए सैकड़ों मील की पैदल यात्रा आनंद के साथ करते हैं और महाशिवरात्रि पर्व पर इनकी संख्या एकाएक बांदकपुर धाम में बढ़ जाती है। जिसके पीछे एक पुरातन धार्मिक मान्यता है कि सवा लाख कांवर देव जागेश्वरनाथ धाम में चढ़ जाने पर आमने -सामने बने शिव पार्वती दोनों मंदिरों के झंडे आपस में मिलकर गांठ बंध गई थी जिसको शिवजी के स्वमेव स्वंयवर होने की अध्यात्मिक घटना से जोड़कर देखा जाता है।
विश्वपरिवर्तन की बेला है महाशिवरात्रि
दमोह।प्रजापिताब्रहमाकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की स्थानीय गीता पाठशाला स्टेशन रोड दमोह के तत्वाधान में महाशिवरात्रि का कार्यक्रम बडी धूमधाम से संपन्न हुआ। बीके कुन्ती बहिन ने महाशिवरात्रि का आधात्मिक महत्व बताते हुए कहा कि जब सारे विष्व की आत्माएं दुःखी अशांत तमोप्रधान बन जाती है तब परमपिता शिव परमात्मा प्रजापिता ब्रहमा के तन का आधार ले सुख शांति सम्पन्न दुनिया की स्थापना करते हैं।
अर्थात दुखमय दुनिया को सुखमय संसार बना देते हैं
इसी का ही यादगार महाशिवरात्रि पर्व है।
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