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परमिट के लिए एक भी ऑपरेटर ने नहीं किया आवेदन

6 वर्ष पहले
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जिलेके ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधा को और आसान करने के लिए शासन द्वारा ग्रामीण परिवहन सेवा की शुरूआत की गई है। इसके तहत जिले के 10 नए रूटों पर शासन ने ग्रामीण बस सेवा चलाने की अनुमति प्रदान की है। लेकिन इन रूटों पर बस चलाने में कोई भी बस ऑपरेटर रूचि नहीं ले रहे हैं। एक भी आॅपरेटर ने इन रूटों पर परमिट के लिए आवेदन नहीं किया है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को मजबूरी में लोडिंग वाहनों में यात्रा करना पड़ रही है। गौरतलब हो कि पिछले तीन-चार साल के दौरान जिले के अधिकांश गांव में सड़कों का जाल बिछा दिया गया है। गांव-गांव तक पक्की सड़कें तो बन गईं लेकिन यहां पर बस सुविधा शुरू नहीं की गई है।

येरूट तय किए गए

ग्रामीणपरिवहन सेवा के अंतर्गत शासन ने 10 रूट तय किए हैं। जिनमें पांडाझिर से सिसलीडोह, तारादेही से सारसवगली, तारादेही से चंदना, लुहारी से भटिया, हिंडोरिया बनगांव बांया विलाई, हिंडोरिया से बनवार, पटेरा से रनेह, पथरिया से लडई बम्होरी, कलेहरा से तेजगढ़ एवं कलेहरा से धुनगी शामिल हैं। ये वे रूट है जहां पर पक्की सड़कें तो हैं लेकिन बस ऑपरेटर केवल निर्धारित गांव के बीच ही बस चला सकते हैं। वह शहरों में नहीं जा सकते हैं। दूसरी ओर वर्तमान में सैकड़ों गांव में पक्की सड़क बन गईं हैं इसके बावजूद भी परिवहन विभाग ने नए रूट तय नहीं किए हैं। ऐसे में कोई भी ऑपरेटर आगे नहीं रहे हैं।

जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में लोडिंग वाहनों में ढाेई जा रहीं सवािरयां

बस संचालकों के अनुसार परिवहन विभाग ने जितने भी रूट तय किए गए हैं। वहां पर बस चलाने में कोई लाभ नहीं होगा। वैसे भी ग्रामीण क्षेत्रों में सवारियां अपेक्षाकृत कम मिलती हैं। इसलिए इन रूटों पर बस चलाने में उन्हें आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। बस संचालक विजय बजाज ने बताया कि शासन का गांव में बस चलाने का प्लान अच्छा है लेकिन जो रूट तय किए गए हैं वहां पर बस चलाने में काेई फायदा नहीं है बल्कि घाटा ही लगेगा। तो इन रूटों पर ज्यादा यात्री मिलेंगी। इसके चलते ड्राइवर-कंडक्टर, क्लीनर का वेतन, डीजल का खर्च, गाड़ी की मरम्मत का पैसा निकालना कठिन होगा। बस संचालकों पर भ्ज्ञार अधिक आएगा। उन्होंने बताया कि शासन ने ग्रामीण रूट बस सेवा को गांव से केवल गांव तक ही ले जाने की अनुमति दी है। यदि इन बसों को शहर तक लाने की अनुमति दी जाए तो बेहतर होगा। शासन ने बस संचालकों को गांव में बस चलाने के लिए परमिट देने की सुविधा प्रदान की है। इसके तहत बस की कीमत का एक प्रतिशत पैसा जमा करके संचालक 5 साल के लिए परमिट ले सकता है। पांच साल बाद वे नवीनीकरण बिना पैसा जमा कराए करा सकते हैं। अभी अन्य रूटों के लिए यह सुविधा नहीं है। इतनी सुविधा के बावजूद भी कोई भी बस ऑपरेटर बस चलाने आगे नहीं रहा है।