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सुपोषण अभियान बैठक में नहीं पहुंचे अधिकारी

5 वर्ष पहले
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दमोह। जनपद शिक्षा केंद्र में आयोजित बैठक में उपस्थित गिने चुने कर्मचारी मौजूद थे।

कागजों में निपट गई सुपोषण अभियान की बैठक

भास्कर संवाददाता| दमोह

महिला बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित सुपोषण अभियान की बैठक महज कागजों में सिमटकर रह गई। कलेक्टोरेट के जिला शिक्षा केंद्र में शुक्रवार की दोपहर 2 बजे से बैठक बुलाई गई, जिसमें सभी स्वास्थ्य विभाग के मैदारी अमला सहित सभी परियोजना अधिकारियों व पर्यवेक्षकों को बुलाया गया था। लेकिन यह बैठक मात्र आधा दर्जन लोगों उपस्थिति में कागजों में पूर्ण कर ली गई। हैरानी की बात तो यह है कि स्वास्थ्य विभाग के कुछ कर्मचारी तो बैठक में उपस्थित रहे, लेकिन महिला बाल विकास विभाग का मैदानी अमला नदारद रहा। ऐसे में शासन द्वारा संचालित विभागीय गतिविधियों की पोल खुल गई। सागर से आए यूनिसेफ के अधिकारी तारकेश्वर मिश्रा ने गिने चुने अधिकारी व कर्मचारियों को सुपोषण अभियान के संबंध में समझाया। गौरतलब है कि महिला बाल विकास विभाग की अधिकांश योजनाएं केवल कागजों में ही सिमटकर रह गई हैं। ग्रामीण अंचलों में आंगनबाड़ी केंद्रों के हाल बेहाल हैं। अधिकांश केंद्रों में बच्चों की उपस्थिति नगण्य रहती है लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत से पूरे बच्चों की उपस्थिति दर्शाकर पैसों का भुगतान कर दिया जाता है। अधिकांश केंद्रों में जिम्मेदार अधिकारी निरीक्षण करने नहीं जाते हैं। समीपी ग्राम चौपराखुर्द, मारूताल, कोटातला, भूरी, बिजोरी, हथनी, बालाकोट, हथनी में पदस्थ कार्यकर्ता मनमर्जी से केंद्रों में जाती हैं। अकेले चौपराखुर्द में गांव में 6 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, लेकिन अधिकांश महिलाओं को यह भी पता नहीं कि केंद्र कहां पर खुले हैं। मंगल दिवस, अन्न प्राशन जैसे आयोजन कागजों में निपटा दिए जाते हैं।

हां नहीं आए पाए कर्मचारी
बैठक की सूचना सभी विभागीय परियोजना अधिकारियों को दे दी गई थी। किसी व्यस्तता के कारण वह बैठक में नहीं आ पाए। आगामी दिनों में फिर बैठक बुलाई जाएगी। क्या व्यस्तता थी, यह मुझे नहीं पता। करूणा खरे, सहायक संचालक महिला बाल विकास विभाग

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