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दमोह में लग रहा पत्थर बाजार, हादसों का खतरा
शहरके सबसे व्यस्ततम मार्ग पर सालों लग रहे पत्थर बाजार को हटवाने के लिए कई बार प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा कार्रवाई की गई। कलेक्टर ने भी कोतवाली चौराहा के पास लगने वाले पत्थर बाजार को अन्यत्र भेजने के लिए निर्देश दिए गए थे लेकिन अभी भी सड़क किनारे पत्थर रखकर बेचे जा रहे हैं, जिससे सड़क पर जाम के हालात बनते हैं और दुर्घटनाएं भी होती हैं। वहीं शहर के बीच लगने वाली मांस की दुकानों को हटाने की कार्रवाई भी नहीं की गई। जिससे धार्मिक त्योहारों के दौरान श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
कोतवाली चौराहा से हरिजन थाना के सामने तक सड़क के दोनों ओर पत्थर जमे रहते हैं जिससे ग्राहकों का आना जाना लगा रहा है। पत्थरों के खरीदकर ले जाने वाले लोगों द्वारा पत्थरों को ले जाने के लिए यहां वाहनों को खड़ा किया जाता है जिससे आधी सड़क कवर हो जाती है आधी सड़क पर जाम के हालत बन जाते हैं। जिससे आए दिन हादसे होते हैं। इस मार्ग से होकर बड़ी संख्या में कॉलेज स्कूली छात्र-छात्राएं निकलते हैं, सुबह-शाम इस मार्ग पर निकला मुश्किल होता है। इसके अलावा सुबह नौ बजे तक दमोह-कटनी, बांदकपुर जाने वाली बसें अन्य वाहन निकलते रहते हैं। इस दौरान भी परेशानी होती है। इसके अलावा स्थानीय वार्डवासियों को सबसे ज्यादा परेशानी पत्थर बाजार के कारण होती है। वार्ड की गली में पत्थरों का वाहन खड़ा होने के कारण लोगों को निकलने में दिक्कत होती है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यहां कई बार प्रशासन के अधिकारियों के द्वारा कार्रवाई की गई और सड़क किनारे से पत्थराें को हटाने की समझाइश दी गई, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। कलेक्टर द्वारा भी 31 मार्च तक बाजार को अन्यत्र स्थापित करने के आदेश दिए गए थे, जिसका पालन नहीं हुआ। सड़क किनारे पत्थरों के कारण हादसे होते हैं, पिछले महीने ही हजारी की तलैया निवासी एक बालक इसी मार्ग पर ट्रक की चपेट में आने से मृत हो गया था। चार दिन पहले एक स्कूली छात्रा दुर्घटना का शिकार हो गई थी। इसके पहले भी इस मार्ग पर कई हादसे हो चुके हैं। लेकिन प्रशासनिक अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
मांस दुकानें भी नहीं हटीं
शहरमें रिहायसी इलाकों में मांस की दुकानों पर भी रोक नहीं लगा जा रही है। पर्यूषण पर्व के दौरान शाकाहारी उपासना परिसंघ द्वारा मांस की दुकानों का विरोध किया गया था और प्रशासन से मांग की गई थ