गरबा-डांडिया के साथ मां की उपासना
शहर में नवरात्र का महामहोत्सव चल रहा है। इस दौरान जगह-जगह देवी पंडालों में गरबा-डांडिया नृत्य के आयोजन किए जा रहे हैं। शहर मेंं गरबा-डांडिया का मुख्य आयोजन गुजराती खेराबाल समाज द्वारा किया जा रहा है। जहां नवरात्र के पहले दिन से लेकर नवमी तक यह आयोजन लगातार जारी रहेगा। 25 से शुरू हुआ गरबा महोत्सव का समापन 2 अक्टूबर की शाम महाआरती के साथ होगा। गुजराती खेराबाल समाज द्वारा असाटी वार्ड में समाज के भवन में नवरात्र का महोत्सव हो रहा है। सामने के मैदान में हर शाम गरबा-डांडिया की धूम हो रही है। आयोजन समिति की पूनम मेहता, मेघा ठाकर और धारा धगट ने बताया कि प्रतिदिन शाम को मातारानी के पट खुलने के बाद भगवान गणेश को समर्पित गरबा खेला जाता है। इसके बाद मातारानी के गरबा होते हैं। अंत में रात के समय महाआरती के साथ महारास गरबा कराया जा रहा है। समाज के आलोक ठाकर, उज्जवल मेहता और विवेक जोशी ने बताया कि गुजराती खेराबाल समाज शहर में करीब 85 सालों से नवरात्र पर गरबा का आयोजन करता रहा है। समाज के लोग हर साल इस आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। उन्होंने बताया कि नवरात्र के ठीक पहले समाज के भवन में युवतियों और बच्चों के लिए गरबा का नि:शुल्क प्रशिक्षण कराया जाता है। यह पूरा आयोजन भी समाज के लिए होता है और पूरी तरह नि:शुल्क आयोजन रखा जाता है।
शरदपूर्णिमा के दिन श्रीकृष्ण के लिए करेंगे गरबा
गुजरातीखेराबाल समाज द्वारा परंपरा अनुसार नवरात्र के बाद शरद पूर्णिमा की रात भगवान श्रीकृष्ण के लिए गरबा करते हैं। जिस स्थान पर देवी प्रतिमा रखी जाती है , उसी जगह यह आयोजन होता है। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण की प्रमिमा रखकर गोप-गोपियों के रूप में गुजराती समाज के लोग महारास गरबा करते हैं। इस आयोजन में समाज की महिला-पुरुषों से लेकर बच्चे-बूढ़े भी भागीदारी निभाते हैं। इस साल भी शरद पूर्णिमा पर यह विशेष आयोजन होगा।
दमोह। जेलतिराहा पर विराजमान मातारानी की प्रतिमा।
दमोह। धगटचौराहा स्थित पंडाल में मातारानी के समक्ष गरबा खेलकर मां की उपासना करते युवक-युवतियां और बच्चे।