बिस्किट, सोन पपड़ी के सैंपल फेल
जिलेमें खाद्य पदार्थों में मिलावट का कारोबार नहीं थम रहा है। नामी-गिरामी कंपनियों की वस्तुएं नकली, मिलावटी और फर्जी पैकिंग में बाजार में बिक रही है। एक बार फिर से पारले-जी बिस्किट, सोन पपड़ी सहित मिष्ठान और अन्य खाद्य पदार्थ भोपाल लेबोरेटरी की जांच में अमानक, स्वास्थ के लिए हानिकारक और मिलावटी पाए गए है। अक्टूबर माह में जांच के लिए भेजे गए सैंपलों में 6 सेंपल फिर से फेल हो गए हैं।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी राकेश अहिरवाल ने बताया कि पिछले अक्टूबर माह में विभागीय टीम ने जिले की विभिन्न दुकानों पर छापामार कार्रवाई कर खाद्य वस्तुओं के सेंपल लेकर भोपाल स्थित राज्य विज्ञान प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे थे।
उनमें से आधा दर्जन सैंपलों की रिपोर्ट गई है। जिनमें से कई नामी गिरामी कंपनी के सेंपल भी फेल पाए गए हैं। उन्होंने बताया कि अक्टूबर माह में पटेरा स्थित एक किराना दुकान से पारले-जी बिस्किट के सैंपल लिए थे जो जांच रिपोर्ट में फेल पाए गए हैं। इनमें मित्थाछाप पैकेजिंग पाई गई है। इसी तरह सिंधी कैंप स्थित सोन पपड़ी दुकानदार मनोज कुटेजा की कार से सोन पपड़ी के सेंपल लिए थे। वह भी मित्थाछाप पाई गई है। इसमें बादाम पिस्ता की जगह मूंगफली होना पाया गया।
इसी तरह हिंडोरिया स्थित नेमा स्वीट्स से खोवा बर्फी के सेंपल भी मित्थाछाप पाए गए। इसमें मिल्कमेड की जगह अन्य फेट आरारोट की मिलावट पाई गई है। इसी तरह जबेरा स्थित नीलेश किराना दुकान से मावा का सेंपल भी अमानक श्रेणी का पाया गया है। उन्होंने बताया कि इन सभी दुकानदारों के विरुद्ध एडीएम कोर्ट में प्रकरण कायम किए जाएंगे।
एकसाल में 146 सैंपल लिए गए
गौरतलबहो कि पिछले एक साल के दौरान जिले से 146 सैंपलों को जांच के लिए भोपाल इंदौर स्थित प्रयोगशाला भेजा गया है। जिनमें से 104 सैंपलों की जांच रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी हैं। इनमें से अधिकांश सेंपल फेल पाए गए हैं।
ऐसे मामलों के विरुद्ध कोर्ट में प्रकरण दर्ज किए गए हैं। जिनमें वर्तमान में एडीएम कोर्ट में करीब 40 प्रकरण एवं जिला न्यायालय में भी आधा दर्जन प्रकरण विचाराधीन हैं। अब तक जिन मामलों में फैसला दिया गया है उनमें 3 लाख रुपए का जुर्माना किया गया है। इस प्रकार विभाग को 3 लाख रुपए की राशि जुर्माने के रूप में प्राप्त हो चुकी है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी राकेश अहिरवाल ने बताया कि खाने-पीने